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पुराना समय

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये  उसमें *ENO* डालिये फिर *भटूरे* से फूले पेट को  पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये  *जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य* *आप कभी नहीं समझ पायेंगे* *पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को  *जीभ* से चाटकर *कैल्शियम* की  कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी *लेकिन* इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं  *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!☺️ *पढ़ाई* के *तनाव* हमने  *पेन्सिल* का पिछला हिस्सा  चबाकर मिटाया था ...!!!😀 *पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती*  और *मोरपंख* रखने से हम  *होशियार* हो जाएंगे ... ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था. 😀 *कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां* जमाने का *विन्यास* हमारा  *रचनात्मक कौशल* था ...!!!☺️🙏🏻 हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते* तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना  हमारे जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!☺️ *माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की  कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई*  उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️💕 *सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के  *कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!😀 ...