अध्याय 3 विद्युत रसायन PART - 19

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ईधन सेल - वे सेेल जिनमें हाइड्रोजन ,ऑक्सीजन ,मेथेेन आदि ईंधन के दहन से प्राप्त उर्जा को सीधे को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है ईंधन सेल कहलाते हैं।
उदाहरण - H2-O2 ईंधन सेल इसका सबसे अच्छा उदाहरण है इस तरह के H2-O2 ईंधन सेल का उपयोग चंद्रमा पर उतरने वाले अपोलो अंतरिक्ष यान में सफलतापूर्वक किया गया था।


क्रियाविधि - इस सेल में हाइड्रोजन गैस तथा ऑक्सीजन गैसों को छिद्र युक्त कार्बन इलेक्ट्रोड से होकर सांद्र NaOH या KOH विलयन मेंं बुलबुलों के के रूप में प्रवाहित करते हैं ।
हाइड्रोजन गैस एनोड़ कक्ष मेंं भेजी जाती है  जहां उसका ऑक्सीकरण होता है तथा ऑक्सीजन गैस कैैथोड़ कक्ष में भेजते है जहांं उसका अपचयन होताा है और सेल मेंं अभिक्रिया निम्न प्रकार सेे होती - 
अतः गैसीय मिश्रण को सतत रखने पर सेल लगातार कार्य करते रहता है इस तरह के सेलों को सामान्यतः 70 से 140 डिग्री सेल्सियस ताप पर उपयोग करने पर इनका विभव 0.9 वोल्ट प्राप्त होता है।


ईंधन सेल की विशेषताएं -
1. ईंधन सेलों में किसी भी प्रकार का हानिकारक उत्पाद नहीं बनता है अतः यह  प्रदूषण की समस्या उत्पन्न नहीं करते हैं।
2. ईंधन सेलों की दक्षता लगभग 70 से 75% होती है जो अन्य सेलों से बहुत ज्यादा हैं।
3. यह लगातार विद्युत ऊर्जा  उत्पन्न करने वाले स्रोत होते हैं।

ईंधन सेल के निर्माण में आने वाली कठिनाइयां -
1. गैसीय इंधन को कम ताप पर एवं उच्च दाब पर एकत्र करके रखना कठिन होता है
2. ईंधन सेल इलेक्ट्रोड में प्रयुक्त होने वाले उत्प्रेरक जैसे प्लेटिनम लेड सिल्वर आदि अत्यंत महंगे होते हैं।
3.सेल की दक्षता सैद्धांतिक रूप से लगभग 95% होनी चाहिए किंतु यह 70 से 75% प्राप्त होती है

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