Class 12th Chapter 5 PART 13 ll कोलॉइडी विलयन के गुण- ब्राउनी गति, टिंडल प्रभाव, विद्युत कण संचलन, स्कंदन, रक्षी कोलॉइड आदि
Class 12th Chapter 5 PART - 13
Chemistry By H.K SIR
प्रश्न - कोलॉइडी विलयन के गुण लिखिए ।
उत्तर - कोलॉइडी विलयन के गुण - कोलॉइडी विलयन निम्न गुण प्रदर्शित करते हैं -
A. ब्राउनी गति - इस गति को सबसे पहले अंग्रेज वनस्पतिशास्त्री रॉबर्ट ब्राउन ने सन 1827 में अति सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा था इसलिए इसे ब्राउनी गति कहते हैं ।
बीनर के अनुसार - यह गति कोलाइडी कणों के परिक्षेपण माध्यम के अणुओंं के साथ असमान रूप से टकराने से उत्पन्न होती है ।
अर्थात
कोलाइडी कणों की निरंतर और तीव्र अनियमित टेढ़ी-मेढ़ी गति ब्राउनी गति कहलाती है ।
उदाहरण - 1. ब्राउनी गति के कारण ,रोशनदान से आते हुए प्रकाश के मार्ग में धूल के कण तैरते हुए दिखाई देते हैं ।
2. जल में थोड़ा सा लाइकोपोडियम पाउडर डालने पर उसके कारण इधर-उधर घूमते हुए दिखाई देते हैं ।
B. टिंडल प्रभाव - जब तीव्र प्रकाश की किरण पुंज किसी लेंस द्वारा कोलाइडी विलयन में केंद्रित की जाती है तब किरण पुंज के मार्ग प्रदीप्त हो जाता है ,और अंधेरे में प्रकाश का मार्ग एक चमकीले शंकु के रूप में दिखाई देता है इस घटना को टिंडल प्रभाव कहते हैं और चमकीले शंकु को टिंडल शंकु कहते हैं ।
अथवा
कोलॉइडी विलयन में प्रकाश की किरण गुजरने से किरण के मार्ग में जो प्रदीप्ति उत्पन्न होती है उसे टिंडल प्रभाव या फैराडे - टिंडल प्रभाव कहते हैं इस प्रभाव को सर्वप्रथम फैराडे ने प्रदर्शित किया था तथा टिंडल ने इसका विस्तारपूर्वक अध्ययन किया था ।
कारण - कोलाइडी कण प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करके स्वयं दीप्त हो जाते हैं और फिर अवशोषित प्रकाश को छोटी-छोटी तरंगधैर्य की किरणों के रूप में प्रकीर्णित होने लगते हैं । प्रकाश का यह प्रकीर्णन प्रकाश के मार्ग के लंबवत होता है । इसलिए प्रकाश के मार्ग को संपूर्ण पर देखने पर यह दिखाई देता है ।
उदाहरण -
1. अंधेरे कमरे में किसी रोशनदान से आते हुए प्रकाश मार्ग में धूल के कारण तैरते हुए दिखाई देते हैं ।
2.टिंडल प्रभाव के कारण ही आकाश व समुद्र नीले रंग के दिखाई देते हैं ।
3. तारों का टिमटिमाना भी इसी प्रभाव के कारण ही है।
4.सिनेमा प्रोजेक्टर में किरण पुंज का प्रोजेक्शन , सिनेमा हॉल में उपस्थित धूल व धुंआ द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है
C.विद्युत कण संचलन - कोलॉयडी कण विद्युत आवेशित होते हैं । विद्युत क्षेत्र में यह कण विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोड की ओर गमन करते हैं । अतः -
*विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में कोलॉइडी कणों का विपरीत इलेक्ट्रोड की ओर अभिगमन विद्युत कण संचलन कहलाता है ।*
जैसे - कुछ कोलाइडी का धन विद्युत आवेशित होते हैं जैसे- फेरिक हाइड्रोक्साइड के कोलाइडी कण और कुछ पदार्थों के कोलाइडी कण ऋण विद्युत आवेशित होते हैं -जैसे धातु सल्फाइडों (As2S3)के कोलाइडी कण ।
उपयोग - विद्युत कण संचलन के सिद्धांत का उपयोग न्यूक्लिक अम्ल से प्रोटीन के पृथक्करण एवं सीवेज वर्ज्य से अपवर्ज्य को प्रथक करने में किया जाता है ।
4. स्कंदन (Coagulation) - जब किसी कोलाइडी विलयन में किसी विद्युत अपघट्य का बिलयन थोड़ी मात्रा में मिलाया जाता है तब कोलाइडी कण विद्युत उदासीन होकर परस्पर संयुक्त हो जाते हैं, और अवक्षेप बना लेते हैं अर्थात कोलाइडी कणों के अवक्षेपण की इस क्रिया को स्कंदन कहते हैं ।
उदाहरण - जब आर्सेनिक सल्फाइड(As2S3) की कोलाइडी विलयन में बेरियम क्लोराइड(BaCl2) बिलयन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं तब यह स्कंदित हो जाता है ।
5. रक्षी कोलाइड - यदि किसी द्रव विरोधी कोलाइडी विलयन में द्रव स्नेही कोलाइडी विलयन की कुछ मात्रा मिलाते हैं तो उसका स्थायित्व बढ़ जाता है और इसमें विद्युत अपघट्य मिलाने पर इसका स्कंदन नहीं होता है । इस घटना को रक्षण कहते हैं और इस प्रकार के द्रव स्नेही कोलाइडों को जो द्रव विरोधी कोलाइडी विलयन की स्कंदन से रक्षा करता है, रक्षी कोलाइड कहते हैं। विभिन्न रक्षी कोलाइडों की रक्षण शक्ति भिन्न-भिन्न होती है। जिगमोंडी ने रक्षण शक्ति को स्वर्ण संख्या या गोल्ड संख्या के रूप में व्यक्त किया।
उदाहरण - जब किसी गोल्ड(Au) साल में थोड़ा-सा जिलेटिन मिलाने के बाद सोडियम क्लोराइड मिलाते हैं तब इसका स्कंदन नहीं होता है । जिलेटिन यहां रक्षी कोलाइड का कार्य करता है ।
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