कक्षा 12th अध्याय 5 PART - 6

श्री कोचिंग क्लासेस बेगमगंज
CHEMISTRY By H.K SIR
PART - 6
प्रश्न -  ठोस उत्प्रेरकों की प्रमुख विशेषताएं लिखिए ।
उत्तर -  ठोस उत्प्रेरकों की प्रमुख विशेषताएं निम्न है -
1.सक्रियता
2.वरण क्षमता
3.आकृति चयन
 सक्रियता - किसी उत्प्रेरक द्वारा अभिक्रिया की दर को बढ़ाने की क्षमता उसकी सक्रियता कहलाती है।

वरण क्षमता - किसी उत्प्रेरक का किसी रासायनिक अभिक्रिया में एक निश्चित उत्पाद बनाने की क्षमता वरण क्षमता कहलाती है।

उदाहरण - प्लेटिनम उत्प्रेरक नॉर्मल हेप्टेन (C7H16) को केवल टालूईन  में परिवर्तित करता है जो इसकी वरण क्षमता है।

आकृति चयन - कुछ उत्प्रेरक एक निश्चित आकृति वाले अभिकारक के लिए उत्प्रेरक का कार्य करते हैं यह गुण आकृति चयन कहलाते हैं । ऐसे उत्प्रेरक अपने अनुकूल संरचना वाले अभिकारकों के साथ जुड़कर अभिक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं, किंतु भिन्न आकार वाले अभिकारकों के लिए उत्प्रेरक का कार्य नहीं करते हैं।
उदाहरण - जिओलाइट उत्प्रेरक छिद्रयुक्त होता है इसलिए जो अभिकारक इसके छिद्र में प्रवेश कर जाते हैं उनके लिए यह उत्प्रेरक का कार्य करता है ।

प्रश्न - उत्प्रेरण के प्रमुख सिद्धांतों के नाम लिखिए।
उत्तर - उत्प्रेरण के प्रमुख सिद्धांत निम्न है - 
1. माध्यमिक योगिक सिद्धांत
2. अधिशोषण सिद्धांत
3. संपर्क उत्प्रेरक का आधुनिक सिद्धांत।

1. माध्यमिक योगिक सिद्धांत - इस सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक अभिकारक के साथ उत्प्रेरक संयुक्त होकर पहले माध्यमिक योगिक बनाता है और बाद में उत्पाद बनाकर स्वयं पृथक हो जाता है।
माना एक अभिक्रिया निम्न प्रकार हो रही है -
A + C -----------> AC

AC  +  B  ------> AB  +  C(उत्प्रेरक)

2.अधिशोषण सिद्धांत - इस सिद्धांत के अनुसार पहले अभिकारक उत्प्रेरक की सतह पर सांद्रता बढ़ा देता है और फिर उत्पाद में परिवर्तित हो जाता है।

3. संपर्क उत्प्रेरक का आधुनिक सिद्धांत - पहले अभिकारक उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषित हो जाते हैं जिससे सतह पर इनकी सांद्रता बढ़ जाती है फलस्वरूप अभिक्रिया की दर भी बढ़ जाती है । उत्प्रेरक की सतह पर मुक्त संयोजकता उपस्थित रहती हैं जिससे यह अभिकारक के साथ अस्थाई रूप से बंध बना लेता है अर्थात अभिकारक को अधिशोषित कर लेता है । ऐसा होने से अभिकारक कुछ विकृत तथा तनाव युक्त हो जाता है इसे मध्यवर्ती सक्रिय संकुल कहते हैं ऊर्जा अधिक होने के कारण यह विघटित हो जाता है तथा उत्पाद में परिवर्तित हो जाता है एवं उत्प्रेरक इससे प्रथक हो जाता है जो आगे इसी प्रकार से क्रिया करता है ।
यह सिद्धांत माध्यमिक योगिक सिद्धांत एवं अधिशोषण सिद्धांत का संयुक्त रूप है।

प्रश्न - एंजाइम किसे कहते हैं उदाहरण सहित लिखिए । एवं इसकी क्रिया विधि समझाइए।

उत्तर - एंजाइम - एंजाइम अणु भार वाले नाइट्रोजन युक्त जटिल कार्बनिक योगिक होते हैं जो जीवित कोशिकाओं में उत्पन्न होते हैं यह मुख्य रूप से जैव रासायनिक अभिक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं अतः जैव उत्प्रेरक कहलाते हैं ।
उदाहरण - 1. टायलिन एंजाइम मनुष्य की लार में पाया जाता है जो स्टार्च को ग्लूकोज में बदल देता है।
2. यीस्ट में उपस्थित इनवर्टेज एवं जाइमेज एंजाइम गन्ने की शक्कर को एथिल एल्कोहल में बदल देते हैं ।

एंजाइम उत्प्रेरक की क्रिया विधि - एंजाइम उत्प्रेरक की क्रिया विधि को ताला चाबी के सिद्धांत पर समझाया गया है ।इस सिद्धांत के अनुसार - 
अभिकारक व एंजाइम के मध्य वही संबंध होता है जो ताले व चावी के मध्य होता है पहले अभिकारक पदार्थों के साथ जोड़कर मध्यवर्ती सक्रिय संकुल बनाता है इस संकुल में अभिकारक पदार्थ निकट संपर्क में रहते हैं जिससे यह संयुक्त होकर उत्पाद बना लेते हैं।

प्रश्न - सामान्य उत्प्रेरक एवं एंजाइम में अंतर लिखिए।
उत्तर -

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