Class 12th अध्याय 5 पृष्ठ रसायन PART-9 ll बहुआणविक कोलाइड ll वृहत आण्विक कोलाइड ll संगुणित कोलॉइड ll क्रिस्टलाभ ll कोलॉइड

      CLASS 12th CHEMISTRY BY H.K LODHI
CHAPTER - 5 PART - 9
प्रश्न - परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति के आधार पर कोलाइडी विलयन को कैसे वर्गीकृत किया गया है।
उत्तर - परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति के आधार पर कोलाइडी विलयन को निम्न प्रकार में वर्गीकृत कर सकते हैं -
प्रश्न - परीक्षिप्त प्रावस्था के कणों के आकार के आधार पर कोलाइडी विलयन  को कितने प्रकारों में बांटा गया है ।
उत्तर - परीक्षिप्त प्रावस्था के कणों के आकार के आधार पर कोलाइडी विलयन  को तीन प्रकारों में बांटा गया है - 
1. बहुआणविक कोलाइड (Multimolecular Colloid)

2. वृहत आण्विक कोलाइड(Macromolecular Colloid)

3. संगुणित कोलॉइड (Associated Colloid
)

1. बहुआणविक कोलाइड - इन विलयनों में कोलॉइडी कण कई परमाणुओं एवं अणुओं के झुंड या समूह के रूप में रहते हैं, जिनका व्यास 1nm से कम होता है । इन समूहों में अणु या परमाणु परस्पर वांडरवाल्स  बल द्वारा बंधे रहते हैं।

उदाहरण - गोल्ड के कोलाइडी विलयन में भिन्न-भिन्न आकार के कई परमाणुओं के समूह  कोलॉइडी कण के रूप में होते हैं ।
इसी तरह गंधक के कोलाइडी कणों में हजारों S8 के अणु होते हैं। 

2.वृहत आण्विक कोलाइड - इन कोलाइडों में कोलाइडी कणों के रूप में बड़े-बड़े वृहत अणु होते हैं , जिनमें कई परमाणु विद्यमान होते हैं । बड़ा आकार होने के कारण ये अणु ही कोलाइडी कण के परिमाण के हो जाते हैं और विलायकों में वितरित हो जाते हैं ,अधिकांश द्रव स्नेही कोलाइड इसी श्रेणी में आते हैं । यह कोलाइड अधिक स्थाई होते हैं और अनेक प्रकार से वास्तविक विलयनों से समानता रखते हैं 

उदाहरण -  प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले वृहत अणु जैसे स्टार्च, सैलूलोज ,प्रोटीन एवं एंजाइम तथा मनुष्य द्वारा निर्मित वृहत अणु जैसे- पॉलिथीन, नायलॉन, संश्लेषित रबर आदि । 

3.संगुणित कोलॉइड - वे योगिक जो काम सांद्रता पर सामान्य प्रबल विद्युत अपघट्य की भांति व्यवहार करते हैं ,किंतु उच्च सांद्रता पर अनेक कणों के आपस में जुड़ने के कारण कोलाइडी अवस्था के गुण प्रदर्शित करते हैं ऐसे कणों के समूह को मिसेल कहते हैं तथा ऐसे पदार्थों को संगुणित कोलॉइड कहते हैं ।
जैसे - साबुन, डिटर्जेन्ट आदि ।

 प्रश्न - क्रिस्टलाभ एवं कोलॉइड किसे कहते हैं ?
उत्तर - थॉमस ग्रहम को कोलाइडी रसायन का पितामह कहा जाता है इन्होंने सन 1861 में विलेयशील  पदार्थों को  वनस्पति झिल्ली में से  विसरित होने के आधार पर  दो भागों में बांटा -
1.क्रिस्टलाभ (Crystalloid)
2.कोलॉइड (Colloid)

1.क्रिस्टलाभ - ऐसी पदार्थ जो बिलयन अवस्था में जंतु झिल्ली ,वनस्पति झिल्ली या चर्म पत्र से शीघ्र वितरित हो जाते हैं क्रिस्टलाभ कहते हैं, यह पदार्थ क्रिस्टलीय प्रकृति के होते हैं इसलिए इन्हें क्रिस्टलाभ कहा गया।
जैसे ग्लूकोज, लवण (NaCl), अम्ल , क्षार, कॉपर सल्फेट , फ्रैक्टोज, सुक्रोज, यूरिया आदि ।


2.कोलॉइड - ऐसे पदार्थ जो बिलयन अवस्था में जंतु झिल्ली, वनस्पति झिल्ली या चर्म पत्र से विसरित नहीं होते कोलाइड कहलाते हैं । कोलाइडी विलयन को सॉल भी कहते हैं ।
जैसे - गोंद, जिलेटिन, स्टार्च, प्रोटीन ,रक्त ,दूध ,मक्खन, आइसक्रीम ,एल्बुमिन आदि ।

नोट - आधुनिक मत के अनुसार कोलाइड कोई पदार्थ नहीं है ,बल्कि कोलाइड पदार्थ की एक अवस्था है प्रत्येक पदार्थ को उपयुक्त विधियों द्वारा कोलाइडी अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है। 
जैसे - 1. NaCl जल में क्रिस्टलाभ है जबकि बेंजीन में कोलाइड की भांति व्यवहार करता है ।

2.साबुन जल में कोलाइड है, जबकि एल्कोहल में क्रिस्टलाभ की भांति व्यवहार दर्शाता है।

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