Class 11th Chapter 15 PART 4 ll वायु प्रदूषण एवं उसके कारण और नियंत्रण ll प्रमुख वायु प्रदूषक
Class 11th Chapter 15 PART 4 ll वायु प्रदूषण एवं उसके कारण और नियंत्रण ll प्रमुख वायु प्रदूषक
प्रश्न -वायु प्रदूषण किसे कहते हैं ? इसके कारण एवं रोकथाम के उपाय लिखिए।
उत्तर - वायु प्रदूषण - वायु के भौतिक ,रासायनिक एवं जैविक गुणों में होने वाला अवांछित परिवर्तन जो मनुष्य तथा जैवमंडल पर हानिकारक प्रभाव डालता है ,वायु प्रदूषण कहलाता है।
वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण - वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्न है -
1. घरेलू ईंधन - लकड़ी गोबर के कंडे कोयला आदि के दहन से उत्पन्न गैस हैं दुआ वादी वायु को प्रदूषित कर देते हैं।
2. स्वचालित वाहन - स्वचालित वाहनों में डीजल ,पेट्रोल के दहन से ,कार्बन मोनोऑक्साइड ,कार्बन डाइऑक्साइड ,हाइड्रोकार्बन, सीसे के कण ,कार्बन के कण उत्पन्न होते हैं जो वायु को प्रदूषित करते हैं।
3. उद्योग धंधे - रासायनिक उद्योगों से विभिन्न विषैली गैसों का निर्माण होता है जो वायु को प्रदूषित कर देते हैं।
4. वन - वनों के कटाव से एवं वृक्षारोपण के अभाव से , वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे कार्बन डाइऑक्साइड द्वारा वायु प्रदूषित हो जाती है।
5. जनसंख्या - जनसंख्या में वृद्धि होने से ,शहरीकरण तेजी से वृद्धि हो रही है ।फलस्वरुप जंगल कम हो रहे हैं और प्रदूषण में तेजी से वृद्धि हो रही है।
वायु प्रदूषण रोकने के प्रमुख उपाय - वायु प्रदूषण रोकने के प्रमुख उपाय निम्न है -
1. हानि रहित ईधन का प्रयोग करना चाहिए ।ईंधन के रूप में कंडे आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
2. कारखानों में लंबी-लंबी चिमनीयां लगाना चाहिए ,जिससे गैस वायुमंडल की ऊपरी परत में चली जाती हैं।
3. कारखानों की चिमनियों में धुआं अवक्षेपक लगाना चाहिए ।
4. ईटों के भट्टे, रासायनिक कारखाने शहर के बाहर स्थापित होने चाहिए।
5. अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए ।जिससे शुद्ध वायु मिल सके।
6. मोटर, कार आदि वाहनों में सीसा रहित ईधन का प्रयोग करना चाहिए एवं इंजन की दक्षता उच्च होना चाहिए । जिससे ईंधन का पूर्ण दहन हो सके ।
प्रश्न - प्रमुख वायु प्रदूषक तत्वों के नाम लिखिए। इन का उद्भव कैसे होता है ।
उत्तर - प्रमुख वायु प्रदूषक तत्व निम्न है -
1. कार्बन डाइऑक्साइड -
2. कार्बन मोनोऑक्साइड
3. नाइट्रोजन के ऑक्साइड
4. रेडियोधर्मी पदार्थ
5. सल्फर डाइऑक्साइड
6. कण युक्त पदार्थ
प्रदूषक तत्वों का उद्भव - प्रदूषक तत्वों का उद्भव निम्न प्रकार से होता है -
1. कार्बन डाइऑक्साइड - स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधन के दहन से तथा जीव जंतुओं की श्वसन क्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड बहुत अधिक मात्रा में उत्पन्न होती है।
2. कार्बन मोनोऑक्साइड - जीवास ईंधन के अपूर्ण दहन एवं औद्योगिक गतिविधियों से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस एवं हाइड्रोकार्बन उत्पन्न होते हैं।
3.नाइट्रोजन के ऑक्साइड - प्रायः औद्योगिक क्षेत्रों में रासायनिक पदार्थों के निर्माण के समय नाइट्रोजन के ऑक्साइड उत्पन्न होते हैं।
4. रेडियोधर्मी पदार्थ - नाभिकीय रिएक्टर तथा परमाणु परीक्षण से अनेक प्रकार के रेडियोधर्मी विकिरण एवं तत्व उत्पन्न होते हैं।
5. सल्फर डाइऑक्साइड - कोयले के दहन से तथा उद्योगों में गंधक के दहन से सल्फर डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती हैं।
6. कण युक्त पदार्थ - ईंधन के दहन एवं स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधन के दहन से कार्बन सीसा तथा अन्य पदार्थों के महीन कण उत्पन्न होते हैं ।
प्रश्न - गैसीय प्रदूषकों का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ? समझाइए।
उत्तर - गैसों का मानव जीवन पर बहुत ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है -
1. सल्फर डाइऑक्साइड - सल्फर डाइऑक्साइड गैस श्वास नली एवं फेफड़ों की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है । इस गैस से टीवी ,कैंसर, दमा, खांसी जैसे रोग हो जाते हैं । यह गैस अम्ल वर्षा करती है ।जिससे कीमती इमारतों को नुकसान होता है। इसके कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं ,जिसे क्लोरोसिस कहते हैं।
2. कार्बन मोनोऑक्साइड - CO के कारण व्यक्ति सांस लेने में तकलीफ होने से अथवा दम घुटने से बेहोश हो जाता है।क्योंकि CO गैस रक्त में हीमोग्लोबिन से संयुक्त होकर स्थाई यौगिक कार्बॉक्सी हीमोग्लोबिन बना लेता है ,जिसके कारण रक्त की ऑक्सीजन संवहन करने की क्षमता कम हो जाती है। अत्यधिक कार्बन मोनोऑक्साइड होने पर मर जाते हैं ।सिर दर्द, सिर चकराना ,आंखों के आगे तिलमिले आना ,जी मिचलाना आदि इस गैस की विभिन्न मात्राओं के कारण होता है।
3. कार्बन डाइऑक्साइड - यदि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 0.003% से अधिक हो ,तो वह वायु प्रदूषण बन जाएगी । जंतु एवं मनुष्य द्वारा श्वास में CO2 ग्रहण करने से फेफड़ों की बीमारी हो जाएगी । जीव जंतुओं की कार्य क्षमता एवं जैविक क्रियाएं कम हो जाएंगी।
4. नाइट्रोजन के ऑक्साइड - नाइट्रोजन के ऑक्साइड आंखों में जलन उत्पन्न करती हैं । यह फेफड़ों को निष्क्रिय कर देती है । इन गैसों के प्रभाव से त्वचा रोग जैसे- खाज, खुजली आदि हो जाते हैं।
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