Class 11th Chapter 15 PART 5 ll जल प्रदूषण एवं उसके कारण एवं रोकथाम के उपाय
Class 11th Chapter 15 PART 5 ll जल प्रदूषण एवं उसके कारण एवं रोकथाम के उपाय
उत्तर - जल प्रदूषण - जल के भौतिक ,रासायनिक एवं जैविक लक्षणों में होने वाले अवांछित परिवर्तन जो कि मनुष्य एवं जीव जगत पर हानिकारक प्रभाव डालता हैं ,जल प्रदूषण कहलाता है।
जल प्रदूषण के प्रमुख कारण - जल प्रदूषण के प्रमुख कारण निम्न है -
1. तालाब नदी जलाशय आदि में कपड़े धोने नहाने पशुओं को नहाने से जल प्रदूषित हो जाता है।
2. कारखाने तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों द्वारा अपशिष्ट रासायनिक पदार्थों को जल में बहा दिया जाता है जिससे नदी नाले का जल प्रदूषित हो जाता है।
3. परमाणु विस्फोट से उत्पन्न रेडियोधर्मी पदार्थों का समुचित निष्पादन नहीं होने पर यह भूमिगत स्रोतों में पहुंचकर जल को प्रदूषित कर देते हैं । जैसे डीडीटी ,बीएचसी आदि ।
4. फसलों में प्रयुक्त कीटनाशक, पीडक नाशक आदि रसायनिक पदार्थ बरसात के पानी में घुलकर तालाब ,नदी आदि जल स्रोतों में पहुंच जाते हैं ,जिससे जल प्रदूषित हो जाता है।
5. जले, अधजले तथा बिना जले शवों को जल में बहा देने से जल प्रदूषित हो जाता है।
6. घरेलू अपशिष्ट, अपमार्जक , कूड़ा करकट ,साबुन ,चूल्हे की राख आदि नालियों से होता हुआ जल स्रोतों में जाकर जल को प्रदूषित करता है।
7. तेल शोधक कारखानों से समुद्रों में तेल प्रदूषण होता है।
जल प्रदूषण रोकने के उपाय - जल प्रदूषण रोकने के निम्न उपाय हैं -
1. वाहित मल को जल स्रोतों में नहीं मिलाना चाहिए।
2. रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों को नदी या जलाशय में नहीं बहाना चाहिए।
3. जल स्रोतों के पास गंदगी नहीं होना चाहिए।
4. जानवरों को जलाशय में नहीं नहलाना चाहिए ।
प्रश्न - जल प्रदूषण से मानव जीवन ,वनस्पति एवं जंतुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है ? समझाइए।
उत्तर - जल प्रदूषण के कारण नदियों के डेल्टा, समुद्र तटों और जलाशयों में ,सूर्य का प्रकाश पौधों तक ठीक से नहीं पहुंच पाता, जिससे कि जलीय पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है । और पौधे नष्ट हो जाते हैं।
प्रदूषित जल में रहने वाले जीवो जैसे - मछलियां आदि का जीवन खतरे में पड़ जाता है ।मछलियां प्रदूषित जल में मिले हुए पारा और सीसा आदि लवणों को अपने भीतर लेती है । इससे उनके दिमाग और आंखों पर बुरा असर पड़ता है । दूषित मछलियों के खाने से मनुष्य में तंत्रकीय रोग हो जाते हैं ।कच्चे तेल में एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन होते हैं जो अधिक विषैले होते हैं और इन मछलियों के खाने से कैंसर रोग तक हो जाता है । मनुष्य द्वारा विसर्जित गंदी बस्तियों का जल नदी में बहा देने से कॉलेरा, पेचिश , पीलिया आदि रोग फैलते हैं।
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