Class 12th Chapter 15 PART 3 ll प्रोटीन के स्रोत ll प्रोटीन का महत्व ll

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ll प्रोटीन के स्रोत ll प्रोटीन का महत्व ll प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग ll प्रोटीन की सरंचना ll प्रोटीन के कार्य


प्रश्न - प्रोटीन के स्त्रोत क्या है।
उत्तर - प्रोटीन के स्त्रोत - दूध,पनीर, दालें, मछ्ली,मांस आदि ।

प्रश्न - प्रोटीन का महत्व लिखिए ।
उत्तर - 
1. शरीर के लिए नए तंतुओं का निर्माण

2. टूटी फूटी कोशिकाओं की मरम्मत करना।

3. एमिनो अम्ल का निर्माण करना।

4. मांसपेशियों का संचालन करने में।

5. एंजाइम तथा एंटीबॉडीज का निर्माण करने में।

प्रश्न - मनुष्य में पाए जाने वाले किन्हीं चार प्रोटीनों के नाम लिखिए एवं उनके कार्य बताइए।
उत्तर - मनुष्य में पाए जाने वाले चार प्रोटीनों के नाम निम्न है -

1. हीमोग्लोबिन - यह मनुष्य के रक्त में पाया जाता है तथा यह ऑक्सीजन संवहन का कार्य करता है ।

2. मायोसिन - यह मांसपेशियों में पाया जाता है तथा मांसपेशियों का संचालन करता है ।

3. पेप्सिन - यह मनुष्य के आहारनाल के आमाशय में पाया जाता है तथा भोजन के पाचन में सहायक होता है।

4. फाइब्रिनोजेन - यह रक्त में पाया जाता है तथा रक्त का थक्का जमाने में सहायक है।

प्रश्न - रेशेदार प्रोटीन एवं गोलाकार प्रोटीन किसे कहते हैं।
उत्तर - रेशेदार प्रोटीन - वे प्रोटीन जिसके अवयवी अणुओं के मध्य अंतर अणुक हाइड्रोजन बंध के कारण अणु लंबे धागों के समान होते हैं । रेशेदार प्रोटीन कहलाते हैं 
जैसे - केरोटिन (बॉल ,ऊन , नाखून, सींग आदि) तथा मायोसिन (मांसपेशी) आदि ।

गोलाकार प्रोटीन - वे प्रोटीन जिन के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध की अनुपस्थिति के कारण अणु गोलाकार या शाखित होते हैं गोलाकार प्रोटीन कहलाते हैं।
जैसे - एंजाइम, हार्मोन ,एल्ब्यूमिन आदि।

प्रश्न - प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगों के नाम लिखिए ।
उत्तर - प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगों के नाम निम्न हैं - 

A. क्वाशियोरकर - 
अ. शरीर में सूजन आ जाती है।

ब. त्वचा सूखी और बजरंगी हो जाती है।

स. यकृत की क्रियाशीलता कम हो जाती है।


B. एनीमिया - 
अ. इस रोग में चक्कर आने लगते हैं।

ब. त्वचा में झुर्रियां आ जाती हैं।

C. मरास्मस - इस रोग में बच्चों की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं ।

प्रश्न - प्रोटीन की संरचना को समझाइए।
उत्तर - प्रोटीन की संरचना - प्रोटीन के अणु का निर्माण अमीनो अम्ल से होता है अतः प्रोटीन, अमीनो अम्ल के बहुलक हैं । प्रोटीन की  संपूर्ण संरचना चार पदों में निर्धारित की जाती है -

1. प्राथमिक संरचना - प्रोटीन में एमिनो अम्ल जिस क्रम में व्यवस्थित होते हैं उसे प्राथमिक संरचना कहते हैं।इसका निर्धारण करने के लिए प्रोटीन को जल अपघटन करते हैं एवं इस प्रकार उत्पन्न एमिनो अम्ल की पहचान कर लेते हैं । प्रत्येक की प्रकृति एवं मात्रा, क्रम निर्धारण में प्रयुक्त होती है ।
जल अपघटन के विभिन्न पद हैं - 
प्रोटीन --> प्रोटियोसेस---> पेप्टोंन---> पॉलिपेप्टाइड---> सरल पेप्टाइड--- अल्फा अमीनो अम्ल

2. द्वितीयक संरचना - पॉलिपेप्टाइड, प्रोटीन में जिस प्रकार से जुड़े होते हैं। यह प्रोटीन की द्वितीय संरचना कहलाती है ।अधिकांश प्रोटीन में अल्फा हेलिक्स या बीटा प्लेटेड संरचना पाई जाती है।

3. तृतीयक संरचना - इससे यह ज्ञात होता है कि प्रोटीन अणु किस प्रकार मुड़कर एक विशिष्ट आकृति प्राप्त करता है।

4. चतुर्थक संरचना - इससेेेेेे यह पता चलता है कि पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं एक दूसरे के सापेक्ष  किस प्रकार व्यवस्थित हैं ।


प्रश्न - प्रोटीन को स्थायित्व देने वाले बंधो के नाम लिखिए ।
उत्तर - निम्न प्रकार के बल प्रोटीन संरचना को स्थायित्व देने में सहायक होते हैं -
1. हाइड्रोजन बंध
2. आयनिक बंध
3. सह संयोजी बंध
4. जल विरोधी बंधन या अंतः क्रिया

श्री कोचिंग क्लासेस बेगमगंज
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