Class 12th Chapter 5 PART 10 ll मिसेल ll CMC ll साबुन की प्रक्षालन क्रिया ll कोलॉइड बनाने की विधियां ll ब्रेडिंग की आर्क विधि ll

Class 12th Chapter 5 PART 10
Chemistry by H.K Sir 
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प्रश्न - मिसेल किसे कहते हैं उदाहरण दीजिए ।
उत्तर - मिसेल(Micelles) - वे योगिक जो कम सांद्रता पर सामान्य प्रबल विद्युत अपघट्य की भांति व्यवहार करते हैं ,किंतु उच्च सांद्रता पर अनेक कणों के आपस में जुड़ने के कारण कोलाइडी अवस्था के गुण प्रदर्शित करते हैं, ऐसे कणों के समूह को मिसेल कहते हैं । 
जैसे - साबुन , डिटर्जेन्ट आदि ।
मिसेल एक निश्चित तापक्रम के ऊपर ही बनते हैं और इस तापक्रम को क्राफ्ट तापक्रम कहते हैं जिसे Tk से प्रदर्शित करते हैं ।
इसी प्रकार यह निश्चित सांद्रण के ऊपर बनते हैं इस सांद्रण को क्रांतिक मिसेल सांद्रण (CMC) कहते हैं ।

प्रश्न - साबुन की प्रक्षालन क्रिया (क्रिया विधि) समझाइए ।
उत्तर - साबुन की प्रक्षालन क्रिया - साबुन की कार्यविधि उसके मिसेल के समान कार्य करने की प्रवृत्ति पर आधारित है । साबुन में मैले कपड़े को साफ करने की क्षमता है ,सिर्फ जल यह कार्य नहीं कर सकता । हमारे द्वारा पहने गए कपड़े के मैले हो जाने का कारण यह है कि हमारे शरीर से जो पसीना निकलता है उसके कारण कपड़ा तेल युक्त हो जाता है वायुमंडल से धूल के कण तेल से चिपक जाते हैं और हमारा कपड़ा मेला हो जाता है । कपड़े को साफ करने के लिए उसे पानी में डूबा कर उसमें साबुन लगाते हैं ।
साबुन उच्च वसा अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण होते हैं जब साबुन को जल के संपर्क में लाया जाता है तब यह कार्बोऑक्सिलेट आयन एवं धनायन में वियोजित हो जाता है । कार्बोऑक्सिलेट आयन बाला भाग सिरा(द्रव स्नेही भाग) एवं एल्किल भाग(R)  पूंछ(द्रव विरोधी भाग) होता है ,द्रव विरोधी भाग वसा या तेल के प्रति तथा द्रव स्नेही भाग जल के प्रति अधिक आकर्षण रखता है । जब कार्बोऑक्सिलेट आयन मैल के संपर्क में आता है तब यह द्रव विरोधी भाग द्वारा वसा या तेल के अणु से जुड़ जाता है ,और द्रव स्नेही भाग द्वारा जल से आकर्षित होकर बाहर आ जाता है । इससे वसा या तेल में उपस्थित धूल के कण भी बाहर आ जाते हैं इस प्रकार साबुन द्वारा मैल साफ हो जाता है ।
चित्र -
प्रश्न - द्रव विरोधी कोलाइडी तंत्र बनाने की विधियां लिखिए ।

उत्तर - द्रव विरोधी कोलाइडी तंत्र बनाने की विधियां - ऐसे पदार्थ जो परिक्षेपण माध्यम के संपर्क में आने पर या हिलाने से कोलाइडी विलयन नहीं बनाते द्रव विरोधी कोलाइड कहलाते हैं ,इन पदार्थों के कोलाइडी विलयन बनाने के लिए विशेष विधियां प्रयुक्त की जाती हैं जो निम्न है - 
1. परिक्षेपण विधियां - इस विधि में बड़े कणों को कोलाइडी कणों के आकार में तोड़ते अथवा परीक्षिप्त करते हैं इस प्रयोजन हेतु निम्न विधियों को प्रयोग में लाया जाता है -

a. विद्युत परिक्षेपण या ब्रेडिंग की आर्क विधि

b. पेप्टिकरण विधि

c. अल्ट्रासोनिक परिक्षेपण विधि

d. यांत्रिक परिक्षेपण विधि

2. संघनन विधियां - इन विधियों से कोलाइडी तंत्र प्राप्त करने के लिए इस प्रकार की प्रायोगिक परिस्थितियां उत्पन्न की जाती हैं ताकि कम व्यास वाले अणुओं का संघनन हो सके और कोलॉइड आकार के कण प्राप्त हो जाएं, संघनन के लिए निम्नलिखित रासायनिक और भौतिक विधियां प्रयोग में लाई जाती हैं -

1. रासायनिक विधियां -
a. उभय अपघटन द्वारा
b. ऑक्सीकरण द्वारा
c. अपचयन द्वारा
d. जल अपघटन द्वारा


2. भौतिक विधियां -
a. विलायक परिवर्तन विधि
b. वाष्प संघनन विधि
c. अति शीतलन विधि

प्रश्न - द्रव विरोधी कोलॉयडी विलयन बनाने की ब्रेडिंग की आर्क विधि को समझाइए - 

उत्तर - ब्रेडिंग की आर्क विधि -
1.इस विधि द्वारा प्लेटिनम ,गोल्ड, सिल्वर, कॉपर आदि धातुओं का कोलाइडी विलयन प्राप्त किया जाता है ।

2. जिस धातु का कोलाइडी विलयन बनाना होता है, उसके दो इलेक्ट्रोड बनाते हैं और इन्हें जल आदि परिक्षेपण माध्यम में डूबा दिया जाता हैं ।

3. इस विधि में  परिक्षेपण माध्यम में डूबे इलेक्ट्रॉडों के बीच, उच्च विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है , आर्क के उच्च ताप के कारण धातु वाष्प में परिवर्तित हो जाती है इस धातु की वाष्प बर्फ द्वारा ठंडे किए गए परिक्षेपण माध्यम में तुरंत छोटे-छोटे कणों के रूप में संघनित हो जाती है । जो कोलॉयडी आकार के कण बनाती है ।

4. प्राप्त कोलाइडी विलयन को स्थाई बनाए रखने के लिए उसमें थोड़ी मात्रा में पोटेशियम हाइड्रोक्साइड(KOH) मिला देते हैं ।

चित्र -

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