Class 12th Chapter 5 PART 14 ll हार्डी- शुल्जे नियम ll स्वर्ण संख्या ll समविभव बिंदु
Class 12th Chapter 5 PART 14
Chemistry by H.K Sir
प्रश्न - निम्न को समझाइए -
1.हार्डी- शुल्जे नियम 2. स्वर्ण संख्या
3.समविभव बिंदु
उत्तर - हार्डी- शुल्जे नियम - विद्युत अपघट्य की स्कंदन शक्ति को व्यक्त करने के लिए हार्डी शुल्जे ने एक नियम का प्रतिपादन किया ।इस नियम के अनुसार -
"किसी विद्युत अपघट्य की स्कंदन शक्ति उनकी संयोजकता पर निर्भर करती है । संयोजकता अधिक होने पर स्कंदन शक्ति अधिक एवं संयोजकता कम होने पर स्कंदन शक्ति कम होती है ।"
उदाहरण 1. सोडियम मैग्नीशियम एवं एलुमिनियम की संयोजकता क्रमशः एक-दो एवं तीन होती हैं तथा इसी क्रम में इनकी स्कंदन क्षमता होती है ।
NaCl < MgCl2 < AlCl3
उदाहरण 2. फ्लोरीन, ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन की संयोजकता क्रमशः 1 ,2 एवं 3 होती हैं तथा इसी क्रम में इनकी स्कंदन क्षमता होती है।
HF < H2O < NH3
स्वर्ण संख्या(Gold Number) - जिग्मोंडी ने आपेक्षिक रक्षण शक्ति ज्ञात करने के लिए एक संख्या निर्धारित की जो स्वर्ण संख्या कहलाती है ।
इसके अनुसार -
यह मिली ग्रामों में रक्षी कोलाइड कि वह मात्रा है जो दिए हुए स्वर्ण कोलाइडी विलयन में 10ml में उपस्थित होने पर उसका 1 ml ,10% NaCl (सोडियम क्लोराइड) बिलयन द्वारा स्कंदन होने से रोकती है । स्वर्ण संख्या अधिक होने पर रक्षण शक्ति कम होती है
उदाहरण - जिलेटिन की स्वर्ण संख्या 0.005 से 0.01mg है अर्थात 10ml गोल्ड सॉल में 0.005 से 0.01 मिलीग्राम जिलेटिन डालने पर उसका 10% NaCl के 1ml द्वारा स्कंदन नहीं होगा ।
कुछ रक्षी कोलाइडों की स्वर्ण संख्या -
जिलेटिन (0.005 - 0.01mg)
एल्बुमिन (0.1 - 0.2mg)
स्टार्च (2.0 - 25.0mg)
कैसीन (0.01mg)
हीमोग्लोबिन (0.03mg)
समविभव बिंदु - कोलाइडी कणों पर धन या ऋण आवेश होता है जब किसी सॉल में कोई विद्युत अपघट्य मिलाया जाता है ,तो सॉल के कणों का आवेश विद्युत अपघट्य से प्राप्त हुए विपरीत आवेश वाले आयनों से धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है ,और धीरे-धीरे एक ऐसी अवस्था आ जाती है जब सॉल के कणों पर कोई आवेश नहीं रहता है । इस बिंदु को समविभव बिंदु कहते हैं इस बिंदु पर कोलाइडी विलयन का स्थायित्व कम हो जाता है और कोलाइडी कणों का स्कंदन आसानी से हो जाता है अतः संभव बिंदु परिक्षेपण माध्यम का वह PH या हाइड्रोजन आयन सांद्रण है जिस पर परीक्षिप्त प्रावस्था उदासीन होती है और विद्युत क्षेत्र में अभिगमन नहीं करती है ।
उदाहरण - जब आर्सेनिक सल्फाइड के सॉल में बूंद-बूंद करके तनु सल्फ्यूरिक अम्ल मिलाते हैं तो एक ऐसी अवस्था आती है जब आर्सेनिक सल्फाइड के कोलाइडी कणों का ऋण आवेश अम्ल से प्राप्त हुए हाइड्रोजन आयन के अधिशोषण के कारण उदासीन हो जाता है ।अर्थात विलयन के जिस पीएच पर आर्सेनिक सल्फाइड सॉल आवेश हीन हो जाता है उसे सॉल का संभव बिंदु कहते हैं
CHEMISTRY by H.K Sir
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