कक्षा 11th ll अध्याय - 8 ll भाग - 4 ll इलेक्ट्रोड विभव एवं उसके प्रकार ll मानक इलेक्ट्रोड विभव
Class 11th ll Chapter 8 ll PART - 4 ll
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प्रश्न - नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक है , जबकि नाइट्रस अम्ल ऑक्सीकारक एवं अपचायक दोनों है , क्यों ?
उत्तर - नाइट्रिक अम्ल (HNO3) में नाइट्रोजन अपनी अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था में है और यह ऑक्सीकरण अवस्था कम हो सकती है अर्थात बढ़ नहीं सकती , इसलिए नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक है।
जबकि नाइट्रस अम्ल(HNO2) में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है जो बढ़कर +5 भी हो सकती है तथा घटकर -3 भी हो सकती है । इसलिए नाइट्रिक अम्ल ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों है।
प्रश्न - सल्फर डाइऑक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों का कार्य करता है , जबकि ओजोन केवल ऑक्सीकारक का कार्य करता है , क्यों ?
उत्तर - सल्फर डाइऑक्साइड(SO2) में S की ऑक्सीकरण अवस्था +4 है , जबकि S की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था संख्या +6 तथा निम्नतम ऑक्सीकरण संख्या -2 हो सकती है । अतः SO2 में S इलेक्ट्रॉन त्याग भी सकता है और ग्रहण भी कर सकता है । इसलिए सल्फर डाइऑक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों का कार्य करता है।
जबकि ओजोन(O3) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक शून्य है । अतः ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक -1 या -2 हो सकता है , इसलिए ऑक्सीजन केवल इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकता है । यही कारण है कि ओजोन(O3) केवल ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
प्रश्न - इलेक्ट्रोड विभव किसे कहते हैं ? यह कितने प्रकार का होता है ।
उत्तर - इलेक्ट्रोड विभव (Electrode Potential) - किसी धातु को उसके आयन के संपर्क में रखने पर बने इलेक्ट्रोड के इलेक्ट्रॉन त्यागने या ग्रहण करने की प्रवृत्ति इलेक्ट्रोड विभव कहलाती है ।
अथवा
जब किसी धातु की छड़ को उसके लवण विलयन में डुबाया जाता है , तो उस छड़ पर उत्पन्न विभव को इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।
इलेक्ट्रोड विभव के प्रकार - इलेक्ट्रोड विभव निम्न दो प्रकार का होता है -
1. ऑक्सीकरण विभव - जब इलेक्ट्रोड इलेक्ट्रॉन त्यागता है , तब उत्पन्न विभव को ऑक्सीकरण विभव कहते हैं।
M --------> Mn+ + ne-
2. अपचयन विभव - जब इलेक्ट्रोड इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है , तब उत्पन्न विभव को अपचयन विभव कहते हैं।
Mn+ + ne- --------> M
प्रश्न - मानक इलेक्ट्रोड विभव किसे कहते हैं ? समझाइए ।
उत्तर - मानक इलेक्ट्रोड विभव - जब किसी धातु की छड़ को 25°C ताप पर एक मोल प्रति लीटर सांद्रता वाले विलयन में डुबाया जाता है तो धातु एवं धातु आयन के मध्य जो विभवांतर उत्पन्न होता है , उसे उस धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं और इसे E° से प्रदर्शित करते हैं।
इसका मान धातु आयन की सांद्रता , प्रकृति एवं ताप पर निर्भर करता है ।
इसका उपयोग किसी धातु का इलेक्ट्रोड विभव ज्ञात करने में किया जाता है ।
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