कक्षा 11th ll अध्याय - 8 ll भाग - 5 ll मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड विभव ll विद्युत रासायनिक श्रेणी ll
उत्तर - मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड - जब शुद्ध हैड्रोजन गैस को 25 डिग्री सेल्सियस ताप एवं 1atm दाब पर एक मोल प्रति लीटर सांद्रता वाले HCl विलयन में डुबाया जाता है , तब मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का निर्माण होता है । इस इलेक्ट्रोड का विभव शून्य होता है। इसे SHE या NHE भी कहते हैं।
नामांकित चित्र -
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का निर्माण - इसमें आयताकार प्लेटिनम की एक प्लेट होती है जिस पर प्लेटिनम ब्लैक का लेप कर दिया जाता है । इस प्लैटिनम की प्लेट को प्लेटिनम के तार द्वारा जोड़ देते हैं । जो कांच की नली में लगा रहता है । नली के अंदर यह तार मरकरी की थोड़ी सी मात्रा में डूबा रहता है । प्लेटिनम की प्लेट कांच की जैकेट द्वारा घिरी रहती है । इस जैकेट के ऊपर एक पार्श्व नली जुड़ी रहती है , जहां से शुद्ध हाइड्रोजन गैस को 1 atm दाब पर प्रवाहित किया जाता है और इस इलेक्ट्रोड को एक मोल प्रति लीटर सांद्रता वाले अम्लीय विलयन में 25°C ताप पर डुबाया जाता है तो थोड़ी देर बाद अधिशोषित हाइड्रोजन एवं अम्लीय विलयन के मध्य साम्य स्थापित हो जाता है। और इस प्रकार मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड विभव का निर्माण हो जाता है।
परिस्थिति के अनुसार यह इलेक्ट्रोड एनोड एवं कैथोड़ की भांति व्यवहार करता है।
सेल में होने वाली अभिक्रियाएं -
एनोड पर - H2 ------> 2H+ + 2e-
कैथोड पर - 2H+ + 2e- ------> H2
संपूर्ण सेल अभिक्रियाएं -
H2 <======> 2H+ + 2e-
प्रश्न - विद्युत रासायनिक श्रेणी किसे कहते हैं ? इसकी दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर - विद्युत रासायनिक श्रेणी - तत्वों के मानक अपचयन विभव या मानक इलेक्ट्रोड विभव(E°) के बढ़ते क्रम में एक श्रेणी बनाई गई है , जिसे विद्युत रासायनिक श्रेणी कहते हैं।
विद्युत रासायनिक श्रेणी की विशेषताएं -
1. विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर आने वाली धातु नीचे आने वाली धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
2. हाइड्रोजन से पहले आने वाले तत्व अम्ल में से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देते हैं।
3. विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर धातुओं की क्रियाशीलता घटती है।
Chemistry By H.K Sir
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें