कक्षा 12th अध्याय 8 PART - 2 संक्रमण तत्व से संबंधित प्रश्न

Class 12th Chapter 8 PART 2 ll संक्रमण तत्व से संबंधित प्रश्न

प्रश्न - प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में निम्नलिखित गुणों के परिवर्तन में विवेचना कीजिए - (2019)
1. परमाणु त्रिज्या 
2. आयनन ऊर्जा 
3. धात्विक लक्षण 
4. ऑक्सीकरण अवस्थाएं

1. परमाणु त्रिज्या - संक्रमण तत्व की परमाणु त्रिज्याएं s तथा p-ब्लॉक के तत्वों के मध्य होती हैं , किसी संक्रमण श्रेणी में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि पर परमाणु त्रिज्या क्रमशः घटती है।
प्रारंभ में यह कमी शीघ्रता से होती है और फिर बहुत धीरे-धीरे होने लगती है।


2. आयनन ऊर्जा - संक्रमण तत्वों की प्रथम आयनन ऊर्जा s - ब्लॉक तत्व की आयनन ऊर्जा की तुलना में उच्च , किंतु p -ब्लॉक के तत्वों से कम होती है ।किसी संक्रमण श्रेणी में बाएं से दाएं चलने पर आयनन ऊर्जा का मान धीरे धीरे बढ़ता है । आयनन ऊर्जा में वृद्धि नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण होती है , किंतु यह वृद्धि धीरे-धीरे होती है , क्योंकि नाभिकीय आवेश में वृद्धि का प्रभाव , परिरक्षण प्रभाव में वृद्धि के कारण आंशिक रूप से निरस्त हो जाता है ।


3. धात्विक लक्षण - संक्रमण तत्व धात्विक प्रकृति के होते हैं । यह कठोर , उच्च घनत्व वाले तथा ऊष्मा एवं विद्युत के सुचालक होते हैं और उनमें विशिष्ट धात्विक चमक होती है । इनमें धात्विक लक्षण निम्न आयनन ऊर्जा और रिक्त d - कक्षकों के कारण होता है ।


4. ऑक्सीकरण अवस्थाएं - संक्रमण धातु परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएं अर्थात कई ऑक्सीकरण अवस्था में प्रदर्शित करती हैं , इसका कारण यह है कि इन धातुओं के ns कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों के अतिरिक्त (n - 1)d कक्षकों के कुछ या सभी इलेक्ट्रॉन भी रासायनिक बंध बनाने में भाग ले सकते हैं। क्योंकि इनके ns और (n - 1)d इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में बहुत कम अंतर होता है ।


प्रश्न - संक्रमण धातुएं उच्च गलनांक एवं क्वथनांक दर्शाती हैं , क्यों ? 
उत्तर - इन तत्वों के परमाणु में एक दूसरे के लिए बंधन शक्ति अत्यधिक होती है अर्थात धात्विक बंध प्रबल होता है । अतः इनके गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं ।

प्रश्न - संक्रमण धातुएं परिवर्ती संयोजकता या परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती हैं , क्यों ?
उत्तर - संक्रमण तत्व में एन एस इलेक्ट्रॉनों के अतिरिक्त (n - 1)d ऑर्बिटल के इलेक्ट्रॉन भी रासायनिक बंध बनाने में भाग ले सकते हैं । d - कक्षकों में जितने अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं , वह उतना ही अधिक संयोजकता दर्शाता है । इसीलिए यह तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं ।
जैसे - Fe , +2 व +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है ।


प्रश्न - Zn केवल +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है , क्यों ? 
उत्तर - जिंक परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष में से दो इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद स्थाई विन्यास प्राप्त कर लेता है , इसलिए यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है ।


प्रश्न - संक्रमण धातु में अच्छी उत्प्रेरक होती हैं , क्यों ?
                              अथवा

संक्रमण धातुओंं के उत्प्रेरकीय गुण का स्पष्टीकरण कीजिए ।
उत्तर - 1. संक्रमण तत्वों में अपूर्ण या रिक्त d - कक्षक होते हैं । यह अभिकारकों के साथ अपने रिक्त कक्षकों के द्वारा अस्थाई माध्यमिक यौगिक बना लेते हैं । यह माध्यमिक यौगिक एक निम्नतर सक्रियण ऊर्जा वाला नवीन पथ अभिक्रिया के लिए उपलब्ध कर देते हैं , जिससे अभिक्रिया के वेग में वृद्धि हो जाती है ।

2. यह अधिशोषण के लिए विस्तृत प्रष्ठ क्षेत्र उपलब्ध कराते हैं जो अभिकारकों को अधिशोषित करके उसकी सांद्रता में वृद्धि करते हैं ।

प्रश्न - Zn केवल +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है , क्यों ? 
उत्तर - जिंक परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष में से दो इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद स्थाई विन्यास प्राप्त कर लेता है , इसलिए यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है ।

प्रश्न - संक्रमण धातु में या d - ब्लॉक की धातुएं सरलता से मिश्र धातुएं बना लेती हैं , क्यों ?
उत्तर - संक्रमण धातुओं के परमाण्विक आकार लगभग समान होते हैं जिसके कारण एक धातु के परमाणु दूसरी धातु के परमाणु का उसके क्रिस्टल जालक में से प्रतिस्थापन कर सकते हैं । इस कारण जब दो या दो से अधिक संक्रमण धातुओं के मिश्रित विलयन को ठंडा करते हैं तब प्रायः ठोस मिश्र धातु प्राप्त होती है ।
पीतल , कांसा तथा विभिन्न प्रकार के इस्पात मिश्र धातुओं के उदाहरण हैं , मिश्र धातु अपेक्षाकृत कठोर और उच्च गलनांक वाले होते हैं ।

प्रश्न - संक्रमण धातुएं सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती हैं , क्यों ?
उत्तर - संक्रमण धातु आयनो का रंग अपूर्ण रूप से भरे हुए d - कक्षको के कारण होता है l संक्रमण धातु आयनों में जिनमें अयुग्मित d - इलेक्ट्रॉन है , इस इलेक्ट्रॉन का एक d - कक्षक से दूसरे d - कक्षक में संक्रमण होता है । इस संक्रमण के समय वे दृश्य प्रकाश के कुछ विकिरणों का अवशोषण करते हैं तथा शेष विकिरणों को रंगीन प्रकाश के रूप में उत्सर्जित कर देते हैं । अतः आयन का रंग उसके द्वारा अवशोषित रंग का पूरक नीले रंग का होता है।
जैसे - Cu2+ नीला रंग का होता है ।

प्रश्न - संक्रमण धातुएं धात्विक गुण प्रदर्शित करती हैं , क्यों ?
उत्तर - किसी तत्व द्वारा अपने परमाणु में से एक अथवा दो इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन बनाने की क्षमता पर उसका धात्विक गुण निर्भर करता है , सभी संक्रमण तत्व धातु हैं , क्योंकि इनकी बाहरी कक्षा में एक या दो इलेक्ट्रॉन होते हैं जो कि आसानी से त्यागे जा सकते हैं , क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा निम्न होती है । अतः यह धात्विक प्रकृति के होते हैं ।

प्रश्न - जिंक , कैडमियम एवं मरकरी को संक्रमण तत्व नहीं माना जाता है , क्यों ?
उत्तर - ऐसे तत्व जिनमें d - उपकोश आंशिक रूप से भरे हुए रहते हैं , उन्हें संक्रमण तत्व कहते हैं ।
जबकि जिंक(Zn) , कैडमियम(Cd) एवं मरकरी(Hg) में d - उपकोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं , इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता है ।

प्रश्न - Cu+ रंगहीन है , जबकि Cu2+ रंगीन होता है , क्यों ?
उत्तर - Cu+ का उपकोश पूर्ण भरा होता है । इस प्रकार इनका d-d संक्रमण नहीं होता है और वह सफेद अथवा रंगहीन रहता है ।
जबकि Cu2+ में अयुग्मित 3d इलेक्ट्रॉन होने के कारण एवं d-d संक्रमण संभव होने के कारण वह रंगीन होता है।

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