प्रश्न - क्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाने की विधि लिखिए तथा इसके उपयोग लिखिए ।
अथवा
पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाने की विधि , गुण एवं उपयोग लिखिए ।
उत्तर - पोटैशियम डाइक्रोमेट एक महत्वपूर्ण ऑक्सीकारक है । इस यौगिक में क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था +6 होती है ।
पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाने की विधि - पोटैशियम डाइक्रोमेट को क्रोमाइट अयस्क या क्रोम आयरन या फेरोक्रोम से बनाया जाता है । जो निम्नलिखित पदों में होते हैं -
1. क्रोमाइट अयस्क (FeCr2O4) का सोडियम क्रोमेट(Na2CrO4) में परिवर्तन - क्रोमाइट अयस्क को सोडियम हाइड्रोक्साइड या सोडियम कार्बोनेट के साथ वायु की उपस्थिति में एक परावर्तनी भट्टी में गरम करने पर सोडियम क्रोमेट बनता है ।
4FeCr2O4 + 16NaOH + 7O2 ---> 8Na2CrO4 + 2Fe2O3 + 8H2O
पदार्थ को छिद्रमय रखने हेतु कुछ मात्रा में शुष्क चूने को मिलाते हैं । जल के साथ निष्कर्षण करने पर Na2CrO3 विलयन में चला जाता है जबकि आयरन ऑक्साइड (Fe2O3) रह जाता है जिसे छानकर अलग कर लेते हैं ।
2. सोडियम क्रोमेट (Na2CrO4 )का सोडियम डाई क्रोमेट (Na2Cr2O7 )में परिवर्तन - सोडियम क्रोमेट विलयन सांद्र H2SO4 के साथ अभिक्रिया करके सोडियम डाई क्रोमेट बनाता है।
Na2CrO4 + H2SO4 ----> Na2Cr2O7 + Na2SO4 + H2O
सोडियम क्रोमेट (Na2CrO4) कम विलेय होता है । जिसका वाष्पन करने पर Na2SO4 . 10H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत हो जाता है जिसे पृथक कर लिया जाता है ।
3. सोडियम डाई क्रोमेट(Na2Cr2O7 ) का पोटैशियम डाईक्रोमेट (K2Cr2O7 ) में परिवर्तन - सोडियम डाई क्रोमेट के जलीय विलयन का उपचार के KCl के साथ किए जाने पर पोटेशियम डाई क्रोमेट प्राप्त होता है । पोटेशियम डाई क्रोमेट के अल्प विलेय प्रकृति के कारण इसके क्रिस्टल ठंडे में प्राप्त किए जाते हैं ।
Na2Cr2O7 + 2KCl ----> K2Cr2O7 + 2NaCl
K2Cr2O7 के गुण -
1. K2Cr2O7 नारंगी लाल रंग का क्रिस्टलीय ठोस है जिसका गलनांक 670 K है ।
2. यह ठंडे जल में कम विलेय हैं किंतु गर्म जल में विलेय है ।
3. यह प्रबल ऑक्सीकारक है ।
K2Cr2O7 के उपयोग -
1. ऑक्सीकारक के रूप में ।
2. चमड़ा उद्योग में क्रोम टेनिंग के लिए ।
3. प्रयोगशाला में कांच के पात्रों की सफाई के लिए ।
4. रंगाई व छपाई में , फोटोग्राफी में ,
5. जिलेटिन फिल्म के कठोरीकरण के लिए ।
6. क्रोमियम के योगिक बनाने में ।
प्रश्न - क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण समीकरण सहित लिखिए ।
उत्तर - क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण - क्रोमायल क्लोराइड परीक्षण का उपयोग क्लोराइड आयन के निश्चय आत्मक परीक्षण के लिए करते हैं ।
जब किसी धातु क्लोराइड को ठोस पोटैशियम डिक्रोमेट एवं सांद्र H2SO4 के साथ गर्म किया जाता है तब गहरे नारंगी रंग की क्रोमिल क्लोराइड की वाष्प उत्पन्न होती है ।
Na2Cr2O7 + 3H2SO4 + 4NaCl ---->
2CrO2Cl2 + K2SO4 + 2Na2SO4 + H2O
प्रश्न - पायरो लुसाइट से KMnO4 बनाने की विधि , गुण एवं उपयोग लिखिए।
उत्तर - पोटेशियम परमैग्नेट एक प्रबल ऑक्सीकारक है । यह विभिन्न माध्यमों के विलयनों में भिन्नता के साथ ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है । पोटेशियम परमैग्नेट को बोलचाल की भाषा में पोटाश या लाल दवा कहा जाता है , जिसे पायरो लुसाइट नामक अयस्क से बनाया जाता है , जो मुख्य रूप से MnO2 होता है ।
KMnO4 बनाने की विधि -
1. पायरो लुसाइट (MnO2) का KMnO4 में परिवर्तन - पायरो लुसाइट को वायुमंडलीय ऑक्सीजन में पोटेशियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिकृत पर पोटेशियम मैग्नेट का हरा पदार्थ बनता है ।
MnO2 + KOH + O2 -----> K2MnO4 + H2O
2. पोटेशियम मैग्नेट (K2MnO4) का पोटेशियम परमैग्नेट (KMnO4) में परिवर्तन - K2MnO4 के हरे पदार्थ को Cl2 या CO2 के साथ निष्कर्षित करके रासायनिक ऑक्सीकरण या विद्युत अपघटनी ऑक्सीकरण द्वारा KMnO4 में ऑक्सीकृत करते हैं ।
2K2MnO4 + Cl2 ------> 2KCl + 2KMnO4
या
3K2MnO4 + CO2 ------> 2K2CO3 + 2KMnO4 + 2MnO2
KMnO4 के गुण -
1. यह गहरा बैगनी क्रिस्टलीय ठोस है ।
2. यह 240°C पर अपघटित होता है ।
3. यह जल में कम विलेय हैं ।
4. यह प्रबल ऑक्सीकारक है ।
KMnO4 के उपयोग -
1. प्रयोगशाला एवं उद्योगों में ऑक्सीकारक के रूप में ।
2. कार्बनिक यौगिकों के असंतृप्तता परीक्षण में ।
3. शुष्क सेलों में ।
4. कुछ यौगिकों के गुणात्मक विश्लेषण में ।
5. ऊन , कॉटन , सिल्क एवं अन्य टेक्सटाइल फाइबर के विरंजन में ।
6. तेलों को रंगहीन करने में ।
7. जल के शोधन में ।
प्रश्न - K2Cr2O7 एवं KMnO4 के अम्लीय माध्यम में ऑक्सिकारक गुण लिखिए ।
उत्तर -
Chemistry by H.K Sir
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