Class 11th Chapter 15 PART 07 ll औद्योगिक अपशिष्ट ll मृदा प्रदूषण

Class 11th Chapter 15 PART 07 ll औद्योगिक अपशिष्ट ll मृदा प्रदूषण


प्रश्न - औद्योगिक अपशिष्ट से आप क्या समझते हो ?
उत्तर - औद्योगिक अपशिष्ट - उद्योगों से व्यर्थ के रूप में, पूर्ण रुप से अनुपयोगी तथा हानिकारक पदार्थ निकलते हैं ,जिन्हें औद्योगिक अपशिष्ट कहते हैं। यह सूक्ष्म मात्रा में ही हानिकारक होते हैं।


औद्योगिक अपशिष्ट का मानव जीवन पर प्रभाव - 

1. कैडमियम - 

2. जिंक - जिंक के सूक्ष्म कणों से सिर में चक्कर आना सुस्ती चलने फिरने में कमजोरी थकावट आदि बीमारियां हो जाती हैं।

3. पारा - पारेे के कण हमारे शरीर के भीतर पहुंचकर यकृत, ग्रंथियों और दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं । तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की बीमारियां हो जाती हैं ।पलकों और हाथों में कंपन होने लगता है। मसूडे सूज जाते हैं और मुंह का स्वाद कसैला हो जाता है।

4. सीसा - सीसे के सूक्ष्म कणों से सर दर्द ,अरक्तता के साथ मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द तथा मसूड़ों पर नीली रेखाएं बन जाना ,हाथों में कंपन,अंगघात ,भूख ना लगना, वमन ,अमाशय में ऐंठन, हाथों में गड़बड़ी आदि रोग हो जाते हैं।

5. एस्बेस्टस - एस्बेस्टस के कणों से सांस फूलना, खांसी ,वजन में कमी ,क्षयरोग तथा फेफड़ों में कैंसर हो जाता है।

उदाहरण - SO2, CO2, NO2 गैसें ,आर्सेनिक युक्त वाष्प, फ्लोराइड, धुएं आदि।

प्रश्न - मृदा प्रदूषण से आप क्या समझते हो ? मृदा प्रदूषण के प्रमुख कारण एवं प्रभाव लिखिए।
उत्तर - मृदा प्रदूषण - मिट्टी के भौतिक एवं रासायनिक गुणों में ऐसा परिवर्तन जो कि इसकी भौतिक गुणवत्ता तथा उपयोग को कम कर दे या नष्ट कर दें ,मृदा प्रदूषण कहलाता है।


मृदा प्रदूषण के कारण - 
1. घरेलू अपशिष्ट - रसोई के अपशिष्ट ,लकड़ी ,कांच, मिट्टी के बर्तन के टुकड़े, राख ,कागज आदि।

2. नगरपालिका अपशिष्ट - जैसे- सड़े-गले फल-सब्जी ,उद्योगों का कूड़ा-करकट ,कचरा, प्लास्टिक, पॉलीथिन ,वधशाला की हड्डियां आदि।

3. रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक - खेतों में प्रयुक्त पेस्टिसाइड, कीटनाशी, कवकनाशी आदि दवाइयों का उपयोग।

4. औद्योगिक अपशिष्ट - कपड़े, रेशे ,कच्चा माल ,कार्बनिक रसायन, फ्लाई एश आदि।


मृदा प्रदूषण के प्रभाव - 

1. सीवेज में डिटर्जेंट ,बोरेट, फास्फेट तथा अन्य लवण की भारी मात्रा घुली रहती है ,जो मिट्टी की भौतिक दशा को बिगाड़ देते हैं।

2.मल में अनेक प्रकार के रोगजनक बैक्टीरिया एवं कीटाणुओं की उपस्थिति तथा विभिन्न भारी तत्वों के कारण भूमि
 में विषाक्तता उत्पन्न होती है ,जो फसलों, पशुओं एवं मनुष्य के लिए हानिकारक सिद्ध होती है।

3. नदी प्रदूषण से मिट्टी के पीएच, धनायन अवशोषण क्षमता, मृदा जीवो की कार्यक्षमता, आदि पर भी प्रभाव पड़ता है।

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