Class 11th Chapter 6 ll निकाय एवं उसके प्रकार ll परिवेश ll PART - 01
Class 11th Chapter 6 PART 1
प्रश्न - ऊष्मागतिकी किसे कहते हैं ? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर - ऊष्मागतिकी - रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत हम किसी भौतिक व रासायनिक परिवर्तन के संपन्न होने पर उसमें ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन तथा उनके बीच मात्रात्मक संबंधों का अध्ययन करते हैं ,रासायनिक ऊष्मागतिकी कहलाती है।
ऊष्मागतिकी का महत्व -
1.इसके द्वारा भौतिक रसायन के अनेक नियमों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
2.इसके आधार पर दिए गए ताप, दाब एवं सांद्रता पर कोई रासायनिक क्रिया के संपन्न होने की संभावना व्यक्त की जा सकती है।
प्रश्न - निकाय एवं परिवेश से आप क्या समझते हो ?
उत्तर - निकाय(System) - ब्रह्मांड का वह भाग जो कणों की बहुत सी संख्या से बना होता है तथा जिसे ऊष्मागतिकी के अध्ययन के लिए चुना जाता है ,तंत्र या निकाय कहलाता है।
जैसे - जल, चाय का प्याला, बर्फ आदि निकाय के उदाहरण हैं।
परिवेश (Surroundings) - निकाय के अलावा ब्रह्मांड का वह भाग जो तंत्र पर सीधा प्रभाव डाल सकता है ,परिवेश या पारिपार्श्विक कहलाता है।
जैसे - मछली एक निकाय है, जबकि उसके चारों ओर का जल उसका परिवेश है।
प्रश्न - निकाय कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर - निकाय के प्रकार - द्रव्य एवं ऊर्जा के आदान-प्रदान के आधार पर निकाय को तीन प्रकारों में बांटा गया है -
1. खुला निकाय (Open System)
2. बंद निकाय (Close System)
3. विलगित निकाय (Isolated System)
1. खुला निकाय (Open System) - वह निकाय जो अपने परिवेश के साथ ऊर्जा एवं द्रव्य दोनों का आदान प्रदान कर सकता है खुला निकाय कहलाता है ।
जैसे - खुले बीकर में रखा गर्म जल गर्म । गरम जल में से भाप एवं ऊर्जा दोनों परिवेश में चले जाते हैं।
2. बंद निकाय (Close System) - वह निकाय जो अपने चारों ओर के परिवेश से ऊर्जा का आदान - प्रदान कर सकता है, किंतु द्रव्य का नहीं ,बंद निकाय कहलाता है। इस तंत्र की सीमा रेखा बंद होती है, किंतु सील नहीं होती है ।
जैसे - स्टील के बंद डिब्बे में रखे दूध का ठंडा होना बंद निकाय का उदाहरण है। इस निकाय में से ऊर्जा परिवेश में चली आती है और दूध (द्रव्य) डिब्बे में ही बना रहता है।
3. विलगित निकाय( Isolated system) - वह निकाय जो अपने चारों ओर के परिवेश से न तो ऊर्जा और न ही द्रव्य का आदान - प्रदान करता है, विलगित निकाय कहलाता है । ऐसे निकाय की सीमा रेखा क्रोधित होती है ।
जैसे - बंद थरमस में रखी गई गरम चाय।
प्रश्न - अवस्था फलन किसे कहते हैं ? इसके प्रकारों को समझाइए।
उत्तर - अवस्था फलन (State function)- किसी तंत्र की वह स्थिति जिसमें उसके स्थूल गुण निश्चित होते हैं ,अवस्था फलन कहलाते हैं।
अथवा
ऊष्मागतिकी के कुछ पैरामीटर जो तंत्र की प्रारंभिक एवं अंतिम अवस्था पर निर्भर करते हैं, अवस्था फलन कहलाते हैं ।
जैसे - आंतरिक ऊर्जा, एंथैल्पी, एंट्रॉपी ,मुक्त ऊर्जा आदि अवस्था फलन है।
अवस्था फलन के प्रकार - अवस्था फलन दो प्रकार के होते हैं -
A. विस्तीर्ण या मात्रात्मक गुण (Extensive properties)
B. गहन या विशिष्ट गुण (Intensive properties)
A. विस्तीर्ण या मात्रात्मक गुण - निकाय के वे गुण जो निकाय में उपस्थित पदार्थ की मात्रा पर निर्भर करते हैं, उसकी प्रकृति पर नहीं । मात्रात्मक गुण कहलाते हैं ।
जैसे - एंट्रॉपी, एंथैल्पी, मुक्त ऊर्जा ,आंतरिक उर्जा, द्रव्यमान, आयतन ,उष्मा धारिता आदि।
B. गहन या विशिष्ट गुण - निकाय के वे गुण जो निकाय में उपस्थित पदार्थ की मात्रा पर निर्भर नहीं करते ,बल्कि उसकी प्रकृति पर निर्भर करते हैं ।विशिष्ट या गहन गुण कहलाते हैं ।
जैसे - श्यानता ,विशिष्ट ऊष्मा, घनत्व ,ताप ,दाब आदि।
प्रश्न - स्थूल तंत्र, तंत्र की अवस्था एवं पथ फलन से आप क्या समझते हो ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर - स्थूल तंत्र (Macroscopic system)- ऐसा निकाय जो बहुत से कणों,अणुओं, परमाणुओं से मिलकर बना होता है, स्थूल तंत्र कहलाता है ।
जैसे - दाब, आयतन,ताप, श्यानता,तालाब, रेगिस्तान, पहाड़ आदि।
तंत्र की अवस्था - किसी तंत्र को अस्तित्व में बनाए रखने के लिए ऐसी परिस्थितियां जिससे तंत्र के स्थूल गुण निश्चित रहे ,तंत्र की अवस्था कहलाती है।
जैसे - जैसे 25°C ताप पर जल एक तंत्र है ,यदि ताप 50°C कर दिया जाए तो इसके स्थूल गुण बदल जाएंगे और यह दूसरी अवस्था प्राप्त कर लेगा।
पथ फलन - निकाय के वे गुण जो उस पथ पर निर्भर करते हैं, जिस पथ से तंत्र प्रारंभिक अवस्था से अंतिम अवस्था में आया है।
जैसे - कार्य व ऊष्मा
श्री कोचिंग क्लासेस बेगमगंज
Chemistry by H.K Sir
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