Class 11th Chapter 6 PART 02 ll अवस्था फलन ll पथ फलन ll तंत्र की अवस्था ll स्थूल तंत्र ll ऊष्मागतिक प्रक्रम
Class 11th Chapter 6 PART 02 ll अवस्था फलन ll पथ फलन ll तंत्र की अवस्था ll स्थूल तंत्र ll ऊष्मागतिक प्रक्रम
उत्तर - अवस्था फलन (State function)- किसी तंत्र की वह स्थिति जिसमें उसके स्थूल गुण निश्चित होते हैं ,अवस्था फलन कहलाते हैं।
अथवा
ऊष्मागतिकी के कुछ पैरामीटर जो तंत्र की प्रारंभिक एवं अंतिम अवस्था पर निर्भर करते हैं, अवस्था फलन कहलाते हैं ।
जैसे - आंतरिक ऊर्जा, एंथैल्पी, एंट्रॉपी ,मुक्त ऊर्जा आदि अवस्था फलन है।
अवस्था फलन के प्रकार -अवस्था फलन दो प्रकार के होते हैं -
A. विस्तीर्ण या मात्रात्मक गुण (Extensive properties)
B. गहन या विशिष्ट गुण (Intensive properties)
A. विस्तीर्ण या मात्रात्मक गुण - निकाय के वे गुण जो निकाय में उपस्थित पदार्थ की मात्रा पर निर्भर करते हैं, उसकी प्रकृति पर नहीं । मात्रात्मक गुण कहलाते हैं ।
जैसे - एंट्रॉपी, एंथैल्पी, मुक्त ऊर्जा ,आंतरिक उर्जा, द्रव्यमान, आयतन ,उष्मा धारिता आदि।
B. गहन या विशिष्ट गुण - निकाय के वे गुण जो निकाय में उपस्थित पदार्थ की मात्रा पर निर्भर नहीं करते ,बल्कि उसकी प्रकृति पर निर्भर करते हैं ।विशिष्ट या गहन गुण कहलाते हैं ।
जैसे - श्यानता ,विशिष्ट ऊष्मा, घनत्व ,ताप ,दाब आदि।
प्रश्न - स्थूल तंत्र, तंत्र की अवस्था एवं पथ फलन से आप क्या समझते हो ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर - स्थूल तंत्र (Macroscopic system)- ऐसा निकाय जो बहुत से कणों,अणुओं, परमाणुओं से मिलकर बना होता है, स्थूल तंत्र कहलाता है ।
जैसे - दाब, आयतन,ताप, श्यानता,तालाब, रेगिस्तान, पहाड़ आदि।
तंत्र की अवस्था - किसी तंत्र को अस्तित्व में बनाए रखने के लिए ऐसी परिस्थितियां जिससे तंत्र के स्थूल गुण निश्चित रहे ,तंत्र की अवस्था कहलाती है।
जैसे - जैसे 25°C ताप पर जल एक तंत्र है ,यदि ताप 50°C कर दिया जाए तो इसके स्थूल गुण बदल जाएंगे और यह दूसरी अवस्था प्राप्त कर लेगा।
पथ फलन - निकाय के वे गुण जो उस पथ पर निर्भर करते हैं, जिस पथ से तंत्र प्रारंभिक अवस्था से अंतिम अवस्था में आया है।
जैसे - कार्य व ऊष्मा
प्रश्न - उष्मागतिक प्रक्रम किसे कहते हैं ? इसे कितने प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है।
उत्तर - उष्मागतिक प्रक्रम - वे परिस्थितियां जिनमें कोई उस्मा गतिकी प्रक्रिया संपन्न कराई जाती है उसमें गतिक प्रक्रम कहलाता है।
वर्गीकरण - ऊष्मागतिकी प्रक्रम के आधार पर इन्हें निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है -
1. समतापी प्रक्रम(Isothermal process)
2. समदाबी प्रक्रम(Isobaric process)
3. समआयतनी प्रक्रम (Isochoric process)
4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process)
5. चक्रीय प्रक्रम(Cyclic process)
1. समतापी प्रक्रम - ऐसे प्रक्रम जिनके प्रत्येक पद में निकाय का ताप स्थिर रहता है, समतापी प्रक्रम कहलाता है।
2. समदाबी प्रक्रम - ऐसे प्रक्रम जिनके प्रत्येक पद में तंत्र का दाब स्थिर रहता है ,समदाबी प्रक्रम कहलाता है।
3. समआयतनी प्रक्रम - ऐसा प्रक्रम जिनके प्रत्येक पद में तंत्र का आयतन स्थिर रहता है, समआयतनी प्रक्रम कहलाता है।
4. रुद्धोष्म प्रक्रम - ऐसे प्रक्रम जिनके प्रत्येक पद में निकाय न तो ऊष्मा लेता है और न ही ऊष्मा देता है, रुद्धोष्म प्रक्रम कहलाता है।
5. चक्रीय प्रक्रम - इस प्रकार के प्रक्रम में निकाय एक श्रंखला से गुजरकर अपनी मूल अवस्था में आ जाता है ,इसे चक्रीय प्रक्रम कहते हैं । इसमें ऊर्जा का कोई परिवर्तन नहीं होता है।
प्रश्न - उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय प्रक्रम किसे कहते हैं ? समझाइए।
उत्तर - उत्क्रमणीय प्रक्रम - यह प्रक्रम अत्यंत मंद गति से होते हैं। इस प्रक्रम के प्रत्येक पद में निकाय अपने परिवेश के साथ साम्य में बना रहता है, तब इसे ऊष्मागतिकी उत्क्रमणीय प्रक्रम कहते हैं ।इस प्रकम में अधिकतम कार्य संपन्न होता है ।प्रकृति में इस प्रकार के प्रक्रम नहीं होते हैं। यह सैद्धांतिक प्रक्रम है।
अनुत्क्रमणीय प्रक्रम - वे प्रक्रम जो तीव्र गति से होते हैं तथा जो घटित होते दिखाई पड़ते हैं, अनुत्क्रमणीय प्रक्रम कहलाते हैं । इनमें संचालनकारी बल एवं विपरीतकारी बल में काफी अंतर होता है । इसमें निकाय एवं परिवेश में साम्य नष्ट हो जाता है । यह प्रक्रम वास्तविक होते हैं तथा प्रकृति में होने वाली अधिकांश घटनाएं इसी प्रकार के प्रक्रम है।
प्रश्न - उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में अंतर लिखिए।
उत्तर - उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में अंतर -
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