Class 11th Chapter 6 PART 3 ll आंतरिक ऊर्जा ll एंथैल्पी ll कार्य, ऊष्मा, ताप ll दाब ,आयतन व कार्य में संबंध

Class 11th Chapter 6 PART 3 ll आंतरिक ऊर्जा ll एंथैल्पी ll कार्य, ऊष्मा, ताप ll


प्रश्न - आंतरिक ऊर्जा किसे कहते हैं।
उत्तर - आंतरिक ऊर्जा - किसी निकाय में उपस्थित पदार्थ की सभी प्रकार की ऊर्जाएं जो उसमें उपस्थित रहती हैं ,के योग को आंतरिक ऊर्जा कहते हैं । इसे निहित या नैज ऊर्जा भी कहते हैं। इसे U से प्रदर्शित करते हैं ।

आंतरिक ऊर्जा को निम्न सूत्र के द्वारा व्यक्त करते हैं-

U = Et + Er + Ei + Ev + Ee + En

यहां - 
U - आंतरिक ऊर्जा

Et - स्थानांतरण ऊर्जा

Er - घूर्णन ऊर्जा

Ei - अंतराकर्षण ऊर्जा

Ev - कंपन ऊर्जा

Ee - इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा

En - नाभिकीय ऊर्जा

आंतरिक ऊर्जा के परम मान को ज्ञात कर पाना संभव नहीं होता है ,इसलिए इसे आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन के रूप में ज्ञात करते हैं ।
माना किसी निकाय की प्रारंभिक तथा अंतिम आंतरिक उर्जाएं क्रमशः E1 एवं एवं E2 हैं तब - 

                  ∆U = U2 - U1

जहां ∆U आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन है, जो प्रारंभिक एवं अंतिम अवस्था पर निर्भर करता है।


प्रश्न - एंथैल्पी किसे कहते हैं ? इसे कैसे ज्ञात किया जा सकता है।
उत्तर - एंथैल्पी - किसी निकाय की कुल पूर्ण ऊष्मा निकाय की एंथैल्पी कहलाती है और इसे H से प्रदर्शित करते हैं ।
इसे सूत्र रूप में निम्न प्रकार से लिखा जाता है - 

                      H = U + PV

जहां -
H - निकाय की एंथैल्पी

U - निकाय की आंतरिक ऊर्जा

P - दाब

V - आयतन

अतः किसी निकाय की एंथैल्पी उसके दाब तथा आयतन के गुणनफल तथा आंतरिक ऊर्जा के योग के बराबर होती है ।

एंथैल्पी के परम मान को ज्ञात कर पाना संभव नहीं होता है। इसलिए इसे एंथैल्पी परिवर्तन के रूप में ज्ञात करते हैं।
अर्थात - 

                     ∆H = ∆U + P∆V

यहां -:
∆H = एंथैल्पी परिवर्तन

∆U = आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन

∆V = आयतन परिवर्तन


प्रश्न - कार्य , ऊष्मा एवं ताप से आप क्या समझते हो।
उत्तर - कार्य (Work) - किसी वस्तु का अपने स्थान से विस्थापन कार्य कहलाता है। और इस विस्थापन में प्रयुक्त ऊर्जा कार्य के बराबर होती है । कार्य एक आंतरिक ऊर्जा है । कार्य को W संकेत से प्रदर्शित करते हैं ।

जब कार्य निकाय द्वारा किया जाता है तब इसका मान ऋणात्मक और जब कार्य निकाय पर किया जाता है तब कार्य को धनात्मक माना जाता है।


ऊष्मा (HEAT) - ऊष्मा, ऊर्जा का ही एक रूप है । जिससे हमें गर्मी एवं ठंडक का अनुभव होता है । निकाय एवं परिवेश के तापों में अंतर होने पर ऊर्जा का आदान-प्रदान उष्मा के रूप में होता है । निकाय द्वारा ऊष्मा ग्रहण करने पर q धनात्मक एवं निकाय द्वारा ऊष्मा त्यागने पर q ऋणात्मक लिखते हैं।

ताप (Temperature) - ताप वह भौतिक राशि है जिससे यह पता चलता है कि कोई वस्तु कितनी गर्म अथवा ठंडी है । ताप किसी माध्यम की ऊष्मा की मात्रा का मापन है।





प्रश्न - सिद्ध कीजिए कि - निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन(∆E) स्थिर आयतन पर अवशोषित ऊष्मा(qv) के बराबर होता है।

                         अथवा

दाब ,आयतन एवं कार्य में संबंध लिखिए।


                          अथवा 


सिद्ध कीजिए कि - W = - P∆V

                           अथवा

सिद्ध कीजिए कि - ∆E = qv

उत्तर - दाब , आयतन एवं कार्य में संबंध - 
माना एक सिलेंडर है ,जिसमें गैस भरी हुई है तथा जिसमें भार रहित एवं घर्षण रहित पिस्टन लगा है । जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A , गैस का आयतन V एवं निकाय पर लगाया गया दाब है ।
यदि प्रसार के कारण पिस्टन dl दूरी तय करता है ,जिससे आयतन में परिवर्तन dv हो जाता है ,तब -

               dv  =  A.dl ------(१)

बल = दाब × क्षेत्रफल

                 F  = P . A ----(२)

यदि तंत्र द्वारा किया गया कार्य dW हो तो -

               कार्य = बल × विस्थापन

             dW   = - F × dl

समीकरण (2) से F का मान रखने पर -

              dW = - P . A. dl ----(३)

समी. (१) व (३) से - 

               dW = - P . dv ---(४)

यदि स्थिर दाब पर गैस का आयतन V1 से V2 कर दिया जाए तो समीकरण (४) का समाकलन करने पर - 

समाकलन dW = - P समाकलन dv

समाकलन dx = x

                   W = - P [V]

                   W = - P [V2 - V1]

                   W = - P∆V -------(५)

ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से - 

                ∆E = q + w ----(६)

समीकरण (६) में W का मान रखने पर - 

                 ∆E = q - P∆V

यदि प्रक्रम स्थिर आयतन पर किया जाए तो - 

                   ∆V = 0 या   P∆V = 0

                    ∆E = qv ----------(७)

समीकरण (७) से स्पष्ट है कि निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन(∆E) स्थिर आयतन पर अवशोषित उष्मा(qv) के बराबर होता है।

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