Class 11th Chapter 6 PART 4 ll ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ll ऊष्माशोषी एवं ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं ll
Class 11 th Chapter 6 PART 4 ll ∆U = q + W ll ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ll ऊष्माशोषी एवं ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं ll
प्रश्न - ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम क्या है एवं इसका गणितीय व्यंजक दीजिए।
उत्तर - ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम - इस नियम का प्रतिपादन 1840 में मेयर एवं हेल्महोल्ट्ज ने किया था ।
इस नियम के अनुसार - ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है, और न ही नष्ट किया जा सकता है । इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। अर्थात ब्रह्मांड की कुल ऊष्मा स्थिर है।
गणितीय व्यंजक - माना किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा U1 है । यदि निकाय को ऊष्मा की q मात्रा दी जाए तो उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़कर U1 + q हो जाती है। यदि तंत्र पर W कार्य किया जाए तो तंत्र की अंतिम आंतरिक ऊर्जा बढ़कर U2 के बराबर हो जाएगी तब -
U2 = U1 + q + W
U2 - U1 = q + W
∆U = q + W
यदि कार्य तंत्र द्वारा किया जाता है तब -
∆U = q - W
चक्रीय प्रक्रम में जहां अंतिम और प्रारंभिक अवस्था में एक ही होती हैं अर्थात -
U2 = U1 या ∆U = 0
q - W = 0
q = W
अतः तंत्र द्वारा किया गया कार्य (w), अवशोषित ऊष्मा(q) के बराबर होता है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम की सत्यता के पक्ष में प्रमाण -
1.जब हीटर को विद्युत ऊर्जा दी जाती है तो वह गर्म हो जाता है अर्थात विद्युत ऊर्जा, उष्मीय ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
2. ऐसी कोई भी मशीन का निर्माण कर पाना संभव नहीं है, जो बिना ऊर्जा के चलती हो।
प्रश्न - ऊष्माशोषी एवं ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया से आप क्या समझते हो ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर - ऊष्माशोषी अभिक्रिया - वे अभिक्रियाएं जिनमें ऊष्मा का अवशोषण होता है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं कहलाती हैं।
N2 + O2 ---------> NO ∆H = + Ve
यहां N2 की O2 से क्रिया होने पर NO गैस बनती है, परंतु ऊष्मा देनी पड़ती है अर्थात अभिक्रिया में ऊष्मा का अवशोषण होता है।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया - वे अभिक्रियाएं जिनमें ऊष्मा का उत्सर्जन होता है ,ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं कहलाती हैं।
2NO ------------> N2 + O2 ∆H = - Ve
इस अभिक्रिया में NO को अपघटित करने पर N2 तथा O2 गैस बनती है तथा इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है अर्थात यह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
प्रश्न - सिद्ध कीजिए कि निकाय की एंथैल्पी परिवर्तन स्थिर दाब पर आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन तथा प्रसार में किए गए कार्य के योग के बराबर होती है अर्थात-∆H = ∆U + P∆V
प्रश्न - सिद्ध कीजिए कि - निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन(∆E) स्थिर आयतन पर अवशोषित ऊष्मा(qv) के बराबर होता है।
अथवा
दाब ,आयतन एवं कार्य में संबंध लिखिए।
अथवा
सिद्ध कीजिए कि - W = - P∆V
अथवा
सिद्ध कीजिए कि - ∆E = qv
उत्तर - दाब , आयतन एवं कार्य में संबंध -
माना एक सिलेंडर है ,जिसमें गैस भरी हुई है तथा जिसमें भार रहित एवं घर्षण रहित पिस्टन लगा है । जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A , गैस का आयतन V एवं निकाय पर लगाया गया दाब है ।
यदि प्रसार के कारण पिस्टन dl दूरी तय करता है ,जिससे आयतन में परिवर्तन dv हो जाता है ,तब -
dv = A.dl ------(१)
बल = दाब × क्षेत्रफल
F = P . A ----(२)
यदि तंत्र द्वारा किया गया कार्य dW हो तो -
कार्य = बल × विस्थापन
dW = - F × dl
समीकरण (2) से F का मान रखने पर -
dW = - P . A. dl ----(३)
समी. (१) व (३) से -
dW = - P . dv ---(४)
यदि स्थिर दाब पर गैस का आयतन V1 से V2 कर दिया जाए तो समीकरण (४) का समाकलन करने पर -
समाकलन dW = - P समाकलन dv
समाकलन dx = x
W = - P [V]
W = - P [V2 - V1]
W = - P∆V ---(५)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से -
∆E = q + w ----(६)
समीकरण (६) में W का मान रखने पर -
∆E = q - P∆V
यदि प्रक्रम स्थिर आयतन पर किया जाए तो -
∆V = 0 या P∆V = 0
∆E = qv ----(७)
समीकरण (७) से स्पष्ट है कि निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन(∆E) स्थिर आयतन पर अवशोषित उष्मा(qv) के बराबर होता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें