Class 12th Chapter 7 PART 13 ll समूह 17 के तत्वों का सामान्य परिचय ll समूह 17 के तत्व का नाम ,संकेत , परमाणु क्रमांक एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ll समो 17 के तत्वों के गुणों का वर्णन ll फ्लोरीन का असामान्य व्यवहार
Class 12th Chapter 7 PART 13 ll समूह 17 के तत्वों का सामान्य परिचय ll समूह 17 के तत्व का नाम ,संकेत , परमाणु क्रमांक एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ll समूह 17 के तत्वों के गुणों का वर्णन ll फ्लोरीन का असामान्य व्यवहार
प्रश्न - समूह 17 के तत्वों का सामान्य परिचय लिखिए।
उत्तर - आवर्त सारणी के समूह 17 के तत्व हैलोजन कहलाते हैं । हैलोजन शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ होता है लवण बनाने वाला।
इस समूह में फ्लोरीन(F), क्लोरीन(Cl) ,ब्रोमीन(Br) ,आयोडीन(I) और एस्टाटिन(At) को रखा गया है।
यह सभी P - ब्लॉक के तत्व हैं तथा इनके अंतिम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 np5 होता है। अर्थात इनके अंतिम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
प्रश्न - समूह 17 के तत्वों के नाम, संकेत ,परमाणु क्रमांक एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर - समूह 17 के तत्वों के नाम, संकेत ,परमाणु क्रमांक एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है -
नाम संकेत परमाणु क्रमांक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
फ्लोरीन F 9
क्लोरीन। Cl 17
ब्रोमीन। Br 35
आयोडीन I 53
एस्टाटीन At 85
प्रश्न - समूह 17 के सदस्यों के मुख्य भौतिक लक्षणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
हैलोजन में निम्नलिखित गुणों की प्रवृत्ति स्पष्ट कीजिए -
1. ऑक्सीकरण अवस्था
2.आयनन ऊर्जा
3. विद्युत ऋणात्मकता
4.ऑक्सीकारक गुण
5.इलेक्ट्रॉन बंधुता
6.गलनांक एवं क्वथनांक
7.परमाण्विक एवं आयनिक त्रिज्या
8. भौतिक गुण
9.रंग
उत्तर -
1. भौतिक गुण - क्लोरीन तथा फ्लोरीन सामान्य ताप पर गैसीय अवस्था में रहते हैं, किंतु ब्रोमीन द्रव व आयोडीन वाष्पशील ठोस है।
2. रंग (colour) - सभी हैलोजन रंगीन होते हैं । फ्लोरीन पीली, क्लोरीन हरी - पीली , ब्रोमीन लाल-भूरी तथा आयोडीन बैगनी होती है।
3. आयनन विभव - इनके आयनन विभव उच्च होते हैं तथा समूह में ऊपर से नीचे की ओर आयनन विभव घटता है।
4. विद्युत ऋणात्मकता - इस समूह के तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता अन्य समूह के तत्वों से अधिक होती है तथा समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है ।
ज्ञात तत्वों में फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक है , जिसका मान 4 दिया गया है।
5. परमाणु आयतन ,परमाणु त्रिज्या एवं घनत्व - यह सभी मान परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ बढ़ते हैं।
6. गलनांक एवं क्वथनांक - समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर गलनांक और क्वथनांक कमान बढ़ता है।
7. इलेक्ट्रॉन बंधुता - समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन बंधुता घटती जाती है, क्योंकि बाह्यतम कोश की नाभिक से दूरी बढ़ती है , जिससे परमाणु में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता घटती है।
8. ऑक्सीकारक गुण - हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक हैं इन तत्वों के e- बंधुता अधिक होती है अतः इन में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता अधिक है । इस कारण यह प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं तथा समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर ऑक्सीकारक गुण घटता है ।
9. ऑक्सीकरण अवस्था - हेलोजनों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था - 1 होती है तथा फ्लोरीन को छोड़कर अन्य हैलोजनों की ऑक्सीकरण संख्या +7 तक पाई जाती है।
प्रश्न - फ्लोरीन की अन्य हैलोजनों से भिन्नता के कारण दीजिए।
अथवा
फ्लोरीन अन्य हैलोजनों से किस प्रकार भिन्न है ? समझाइए।
अथवा
फ्लोरीन के असामान्य व्यवहार को समझाइए।
उत्तर - फ्लोरीन अनेक गुणों में अन्य हैलोजनो से भिन्नता रखता है ,फ्लोरीन में असंगत व्यवहार के निम्न मुख्य कारण है -
1. परमाणु का छोटा आकार
2. रिक्त d- कक्षक का अभाव।
3. इलेक्ट्रॉन बंधुता में इसका द्वितीय स्थान ।
4. सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मकता
5. क्लोरीन का केवल एक ऑक्सी अम्ल (HOF) ज्ञात है लेकिन अन्य हैलोजनो अनेक ऑक्सी अम्ल बनाते हैं।
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