Class 12th Chapter 7 PART 3 ll निर्माण की हैबर विधि

Class 12th Chapter 7 PART - 3 ll अमोनिया निर्माण की हैबर विधि


प्रश्न - ट्राई हैलाइडों की अपेक्षा पेंटा हैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं।
उत्तर - केंद्रीय परमाणु की जितनी अधिक धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था होगी, उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी। जिसके कारण केंद्रीय परमाणु और हैलोजन परमाणु के मध्य बने बंध का सहसंयोजी लक्षण बढ़ जाता है । पेंटा हैलाइड में केंद्रीय परमाणु +5 ऑक्सीकरण अवस्था में है, जबकि ट्राई हैलाइड में यह +3 ऑक्सीकरण अवस्था में है । अतः ट्राई हैलाइडों की अपेक्षा पेंटा हैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।


प्रश्न - वर्ग 15 के तत्व के हाइड्राइडों में BiH3 सबसे प्रबल अपचायक है,क्यों ?
उत्तर - वर्ग 15 के सभी तत्वों में Bi परमाणु सबसे बड़ा है । अतः Bi-H आबंध दूरी सबसे अधिक और  Bi-H बंध वियोजन ऊर्जा सबसे कम है । यही कारण है कि  Bi-H बंध, वर्ग के दूसरे हाइड्राइडों की तुलना में आसानी से वियोजित हो जाता है जिसके कारण  BiH3 सबसे प्रबलतम अपचायक है।

प्रश्न - अमोनिया निर्माण की हैबर विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर - अ. सिद्धांत - एक आयतन नाइट्रोजन गैस और तीन आयतन हाइड्रोजन गैस आपस में क्रिया करके अमोनिया बनाते हैं। यह एक ऊष्माक्षेपी क्रिया है । इसमें अमोनिया के बनने से आयतन में कमी होती है ,क्योंकि कुल चार आयतन अभिकारक से दो आयतन क्रियाफल (उत्पाद) प्राप्त होता हैं ।अतः ली - शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार अमोनिया के अधिक उत्पादन हेतु नाइट्रोजन तथा हाइड्रोजन का अधिक सांद्रण कम ताप एवं उच्च दाब ही उपयुक्त परिस्थिति होगी।

ब. अभिक्रिया का समीकरण - 

N2       +     3H2    ------->        NH3

स. नामांकित चित्र - 


द. विधि - वायु से प्राप्त शुद्ध नाइट्रोजन तथा वाटर गैस से प्राप्त हाइड्रोजन को क्रमशः 1:3 अनुपात में मिलाकर 200 वायुमंडलीय दाब पर संपीड़क कक्ष में प्रवेश करते हैं । इसमें Fe चूर्ण एवं उत्प्रेरक वर्धक मोलिब्डेनम(Mo) रखा होता है। इस कक्ष का ताप 450 से 500°C तक नियंत्रित रखते हैं। उत्प्रेरक कक्ष से निकलने वाली गैसों में 10 से 15% तक अमोनिया रहती है ।इसे संघनित्र की सहायता से ठंडा करके अलग कर लेते हैं और शेष गैस को पंप की सहायता से पुनः उत्प्रेरक कक्ष में पहुंचा दिया जाता है। जहां फिर से अमोनियाा बनती है और यह क्रम चलता रहताा है।

ई. सावधानियां - 
1.नाइट्रोजन और हाइड्रोजन शुद्घ एवं शुष्क अवस्था में होनी चाहिए, क्योंकि अशुद्धियां उत्प्रेरक को विषाक्त कर देती हैं।

2. ताप एवं दाब नियंत्रित होनी चाहिए।

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