Class 12th Chapter 7 PART 9 नाइट्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि ll फास्फोरस के अपररूप

Class 12th Chapter 7 PART - 9 ll नाइट्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि ll फास्फोरस के अपररूप


प्रश्न - नाइट्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि को समझाइए।
उत्तर - 1.प्रयोगशाला विधि - प्रयोगशाला में नाइट्रोजन , अमोनियम नाइट्रेट को गर्म करके प्राप्त किया जाता है ।अमोनियम नाइट्रेट एक अस्थाई योगिक है । अतः इसके स्थान पर सोडियम नाइट्राइट तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण के जलीय विलयन को लिया जाता है।


       NH4NO2  ------------>   N2 + H2O

NaNO2 + NH4ClO ------> N2 + H2O + NaCl


उक्त अभिक्रिया में अल्प मात्रा में NO तथा HNO3 भी बनता है ,इन्हें अलग करने के लिए मुक्त हुई नाइट्रोजन गैस को जलीय H2SO4 तथा K2Cr2O7 के विलयन प्रवाहित किया जाता है।

2. अमोनियम डाई क्रोमेट को गर्म करके [ (NH4)2Cr2O7 ] - 

(NH4)2Cr2O7 -------> Cr2O3 + N2 + 4H2O

3.बेरियम एजाइट को गर्म करने से शुद्ध नाइट्रोजन गैस प्राप्त होती है।

         Ba(N3)2 -------> Ba + 3N2


प्रश्न - फास्फोरस के अपररूपों के नाम लिखिए ।
उत्तर - फास्फोरस के कई रूपों में पाया जाता है जो निम्न है - 

1. पीला अथवा श्वेत फास्फोरस

2. लाल फास्फोरस

3. काला फास्फोरस

4. स्कार्लेट फास्फोरस

5. बैगनी फास्फोरस 

1. पीला अथवा श्वेत फास्फोरस - यह फास्फोरस की सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रचुरता से पाए जाने वाली वैरायटी है । इसे रिटार्ट अथवा विद्युत भट्टी से बनाया जाता है । इसकी परमाणुकता चार होती है । अतः यह P4 के रूप में होता है । इसकी आकृति चतुष्फलकीय होती है । जिसके चारों शीर्षों पर चार फास्फोरस परमाणु होते हैं । अतः प्रत्येक फास्फोरस परमाणु तीन अन्य फास्फोरस परमाणुओं से जुड़ा होता है ।

2. लाल फास्फोरस - श्वेत फास्फोरस को जब अक्रिय वातावरण में 573K ताप पर या कई दिनों तक गर्म करने पर प्राप्त होता है । जब लाल फास्फोरस को उच्च दाब पर गर्म किया जाता है तो काले फास्फोरस के प्रावस्थाओं की श्रेणियां प्राप्त होती हैं । श्वेत फास्फोरस के समान लाल फास्फोरस भी P4 अणु के रूप में चतुष्फलकीय होता है । लेकिन यह बहुलक के रूप में होता है। जिसमें P4 चतुष्फलक श्रंखला के रूप में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं । बहुलक संरचना के कारण लाल फास्फोरस का गलनांक 883 K, 317 K की तुलना में उच्च होता है।

3. काला फास्फोरस - काला फास्फोरस दो रूपों में पाया जाता है - अल्फा तथा बीटा

A. अल्फा - काला फास्फोरस - फास्फोरस को 803K ताप या बंद नलिका में गर्म करने पर अल्फा काला फास्फोरस बनता है । इसे वायु में उधर्वापतित किया जा सकता है इसके क्रिस्टल अपारदर्शी, एकनताक्ष , त्रिसमनताक्ष होते हैं। यह वायु में ऑक्सीकृत नहीं होता है।

B. बीटा - काला फास्फोरस - श्वेत फास्फोरस को 473K ताप तथा उच्च दाब पर गर्म करके बीटा काला फास्फोरस बनाया जाता है यह वायु में 673K तक नहीं जलता है।


फास्फोरस के उपयोग - 
1.दियासलाई उद्योग में पहले सफेद फास्फोरस का उपयोग होता था । सफेद सिंदूरी फास्फोरस विषैला होता है , इसलिए अब उसके स्थान पर लाल फास्फोरस या सिंदूरी फास्फोरस ट्राईसल्फाइड का उपयोग होता है।

2. फास्फोरस ब्रांज मिश्र धातु बनाने में।

3. यह अग्नि बंमो ,धूम्रपटो तथा आतिशबाजी में होता है।

4. सफेद फास्फोरस का उपयोग चूहे मारने की दवा बनाने में किया जाता है।

5. अनेक महत्वपूर्ण यौगिक (हाइपोफास्फाइट ,फास्फोरस के क्लोराइड ,फास्फोरिक अम्ल ) के निर्माण में ।


प्रश्न - फास्फोरस हैलाइड बनाने की विधियां लिखिए।

                        अथवा 


PCl3 एवं PCl5 बनाने की विधि लिखिए ।

उत्तर - [ A ]. PCl3 बनाने की प्रयोगशाला विधि - जब शुष्क क्लोरीन को श्वेत या लाल फास्फोरस के ऊपर एक रिटार्ट में धीरे-धीरे गर्म करते हुए प्रवाहित किया जाता है, तो फास्फोरस ट्राई क्लोराइड(PCl3) की वाष्प बनती है।


         P4 + 6Cl2 ---------> 4PCl3


PCl3 के गुण - 1.यह रंगहीन तेलीय द्रव है तथा नमी की उपस्थिति में जल अपघटित हो जाती है।

PCl3 + 3H2O -----> H3PO3 + 3HCl

2. कार्बनिक यौगिक ,जिसमें -OH समूह विद्यमान हो, उसका -Cl समूह से विस्थापन कराता है।

3C2H5OH + PCl3 ----> 3C2H5Cl + H3PO3




 PCl3 की सरंचना - PCl3 की संरचना पिरामिडीय होती है क्योंकि फास्फोरस का sp3 संकरण होने के बाद भी एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण चतुष्फलकीय संरचना पिरामिडीय की संरचना बन जाती है।



           [ B ]   PCl5 बनाने की विधि - 

1. PCl5 ,श्वेत फास्फोरस की शुष्क क्लोरीन के आधिक्य में अभिक्रिया से बनता है।

            P4 + 10Cl2 -----> 4PCl5

2. इसे फास्फोरस पर SO2Cl2 की क्रिया द्वारा नहीं बनाया जा सकता है।

P4 + 10SO2Cl2 ----> 4PCl5 + 10SO2



PCl5 के गुण - 
1. यह पीलिमायुक्त , श्वेत क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है जिसकी गंध तीक्ष्ण होती है।

2. इसे गर्म करने पर यह वियोजित हो जाता है।

        PCl5   ---->  PCl3 + Cl2

3. कार्बनिक यौगिकों के लिए यह प्रबल क्लोरीनीकारक होता है।

C2H5-OH  + Cl2 ----> C2H5-Cl + POCl3 + HCl


4. यह नम वायु में जल अपघटित होकर POCl3 देता है और अंत में फास्फोरिक अम्ल में बदल जाता है।

१. PCl5 + H2O ----> POCl3  + 2HCl

२. POCl3 + 3H2O ----> H3PO4 + 3HCl




 PCl5 की सरंचना - वाष्प अवस्था में PCl5 की आकृति त्रिकोणीय होती है।


उपयोग - कार्बनिक यौगिकों के क्लोरीनीकरण के रूप में प्रयुक्त होता है।

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