कक्षा 11th अध्याय 9 PART - 3 ll भारी जल ll जल की कठोरता ll परम्यूटिट विधि ll
प्रश्न - भारी जल किसे कहते हैं इसके उपयोग लिखिए ।
उत्तर - भारी जल - भारी हाइड्रोजन का ऑक्साइड भारी जल कहलाता है । इसका सूत्र D2O है । इसकी खोज यूरे ने की थी । भारी जल का मुख्य स्रोत साधारण जल है । जिसे सतत विद्युत अपघटन या प्रभाजी आसवन द्वारा प्राप्त करते हैं ।
भारी जल के उपयोग -
1. नाभिकीय रिएक्टर में न्यूट्रॉन मंदक के रूप में ।
2. विद्युत अपघटन द्वारा ड्यूटीरियम बनाने में ।
3. नाभिकीय रिएक्टरों में शीतलक के रूप में ।
प्रश्न - मृदु जल एवं कठोर जल किसे कहते हैं उदाहरण सहित लिखिए ।
उत्तर - मृदु जल - वह जल जो सावन के विलेन के साथ सरलता से झाग उत्पन्न करता है मृदु जल कहलाता है ।
जैसे - आसवित जल , वर्षा जल आदि ।
कठोर जल - वह जल जो साबुन के विलयन के साथ सरलता से झाग उत्पन्न नहीं करता है , कठोर जल कहलाता है ।
जैसे - समुद्री जल , भूमिगत जल आदि ।
प्रश्न - जल में कितने प्रकार की कठोरता पाई जाती है ? जल की कठोरता के कारण लिखिए ।
उत्तर - जल की कठोरता का कारण - जल की कठोरता उसमें उपस्थित कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के क्लोराइड ,सल्फेट एवं बाइकार्बोनेट के कारण होती है ।
जल की कठोरता के प्रकार - जल की कठोरता मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है -
A. अस्थाई कठोरता
B. स्थाई कठोरता
A. अस्थाई कठोरता - अस्थाई कठोरता जल में कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है और इस प्रकार की कठोरता को उबालकर दूर किया जा सकता है , इसलिए इसे अस्थाई कठोरता कहते हैं ।
B. स्थाई कठोरता - स्थाई कठोरता जल में कैल्शियम एवं मैग्निशियम के क्लोराइड एवं सल्फेटों की उपस्थिति के कारण होती है । जल को सामान्यतः उबालकर दूर नहीं किया जा सकता है इसलिए इसे स्थाई कठोरता कहते हैं ।
स्थाई कठोरता को निम्न विधियों द्वारा दूर किया जा सकता है -
A. धावन सोडा द्वारा
B. कैल्गन विधि द्वारा
C. परम्यूटिट विधि द्वारा
प्रश्न - जल की स्थाई कठोरता को दूर करने की परम्यूटिट विधि का सचित्र वर्णन कीजिए ।
उत्तर - परम्यूटिट विधि - परम्यूटिट जिओलाइट श्रेणी का जटिल यौगिक है जिसका सूत्र Na2Al2SiO8.xH2O होता है । इसे Na2Z से प्रदर्शित करते हैं । जहां Z = Na2Al2SiO8.xH2O है अतः परम्यूटिट को सोडियम जिओलाइट भी कहते हैं ।
नामांकित चित्र -
विधि - एक बड़े पात्र में मोटी रेत के ऊपर पर परम्यूटिट भरा जाता है और पात्र में ऊपर की ओर से कठोर जल गिराते हैं , तो तली तक जाकर धीरे-धीरे परम्यूटिट में से होकर ऊपर चढ़ता है । कठोर जल में उपस्थित कैल्शियम एवं मैग्नीशियम आयनों का सोडियम आयनों द्वारा विनिमय हो जाता है और इस प्रकार कठोर जल मृदु हो जाता है ।
Na2Z + Ca2+ -----> CaZ + 2Na+
प्रश्न - हाइड्रोजन पराक्साइड बनाने की प्रयोगशाला विधि का वर्णन कीजिए ।
अथवा
हाइड्रोजन पराक्साइड बनाने की विधियां लिखिए ।
उत्तर - हाइड्रोजन पराक्साइड को प्रयोगशाला में निम्न विधियों द्वारा बनाया जाता है -
1. सोडियम पराक्साइड से - तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के ठंडे विलयन में सोडियम पराक्साइड मिलाने पर हाइड्रोजन पराक्साइड का विलयन प्राप्त होता है । यह 30% H2O2 विलयन होता है ।
H2SO4 + Na2O2 ------> H2O2 + Na2SO4
2. बेरियम पराक्साइड से - एक बीकर में बेरियम पराक्साइड का पानी में गाढा विलयन बना कर उसे बर्फ के पानी में रखकर ठंडा करते हैं । अब इसमें बर्फ द्वारा ठंडा किया तनु सल्फ्यूरिक अम्ल मिलाते हैं । जिससे बेरियम सल्फेट एवं हाइड्रोजन पराक्साइड बनते हैं ।
H2SO4 + BaO2 ------> H2O2 + BaSO4
प्रश्न - हाइड्रोजन पराक्साइड के गुण एवं उपयोग लिखिए ।
उत्तर - हाइड्रोजन पराक्साइड के गुण -
1. यह रंगहीन , गंधहीन एवं कड़वे स्वाद वाला द्रव है ।
2. इसका सांद्र विलयन हल्के नीले रंग का होता है एवं त्वचा पर फफोले उत्पन्न करता है।
3. यह जल , अल्कोहल एवं ईथर के सभी अनुपात में सरलता से मिश्रणीय है ।
हाइड्रोजन पराक्साइड (H2O2) के उपयोग -
1. प्रयोगशाला में ऑक्सीकारक के रूप में ।
2. पुराने तेल चित्रों को साफ करने में ।
3. जीवाणु नाशक के रूप में इसका उपयोग कान , दांत एवं घावों को साफ करने में ।
4. दूध , शराब तथा अन्य पदार्थों के परिरक्षण में ।
5. रेशम , हाथी , दांत आदि के विरंजन में ।
6. वस्त्र उद्योग में ।
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