कक्षा 12th अध्याय 8 PART - 7 ll लैंथेनाइड एवं इनकी विशेषताएं ll लैंथेनाइड संकुचन , इसके कारण एवं परिणाम

प्रश्न - लैंथेनाइड क्या है ? इनका प्रथक्करण कठिन क्यों है समझाइए ।
उत्तर - लैंथेनाइड -  परमाणु क्रमांक 58 से 71 तक वाले तत्व अथवा लैंथेनाइड तत्वों से गुणों में समानता रखने वाले 14 तत्व,  लैंथेनाइड कहलाते हैं । यह तत्व लेंथेनम के समान गुण दर्शाते हैं । इन तत्वों के परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ इलेक्ट्रॉन f कक्षक में प्रवेश करता है , अतः यह f - ब्लॉक के तत्व भी कहलाते हैं ।
लैंथेनाइड संकुचन के कारण तथा बाहरी दो कोश का विन्यास समान होने के कारण इन तत्वों के भौतिक व रासायनिक गुण में अत्यधिक समानता रखते हैं । अतः इनका पृथक्करण कठिन होता है। इन्हे आयन विनिमय विधि द्वारा प्रथक किया जाता है ।

प्रश्न - लैंथेनाइडों की पांच विशेषताएं लिखिए ।
उत्तर -

1.  यह f - ब्लॉक के तत्व हैं ।

2. यह चांदी के समान चमकदार धातुएं हैं ।

3. यह ऊष्मा तथा विद्युत के अच्छे चालक हैं ।

4. इनका गलनांक तथा घनत्व उच्च होता है ।

5. La से Lu तक इनकी परमाणु त्रिज्या में लगातार कमी होती है , इसे लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं।

6. यह द्विक लवण बनाते हैं ।

7. लैंथेनाइड में संकुल बनाने की मध्यम क्षमता होती है तथा बाएं से दाएं चलने पर इसमें वृद्धि होती है ।

8. लैंथेनाइड के हाइड्रोक्साइड आयनिक व क्षारकीय होते हैं ।



प्रश्न - लैंथेनाइड संकुचन से आप क्या समझते हैं ? कारण सहित व्याख्या कीजिए ।

                                अथवा

लैंथेनाइड संकुचन क्या है ? इसका क्या कारण है एवं इसके क्या परिणाम होते हैं ।
उत्तर - लैंथेनाइड संकुचन - लैंथेनाइड के परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ उनके परमाणु एवं अणु के आकार में कमी होती है , इसे लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं ।

लैंथेनाइड संकुचन का कारण -
लैंथेनाइडों में आने वाला नया इलेक्ट्रॉन बाहरी कक्ष में ना जाकर (n - 2)f उपकोश में प्रवेश करता है । फलस्वरुप इलेक्ट्रॉन और नाभिक के मध्य आकर्षण बल में वृद्धि होती है , जिससे परमाणु या आयन संकुचित हो जाता है ।

लैंथेनाइड संकुचन के परिणाम -
1. लैंथेनाइडों के गुणों में परिवर्तन - लैंथेनाइड संकुचन के कारण इनके राशन एग्रो में बहुत कम परिवर्तन होता है अतः शुद्ध अवस्था में प्राप्त करना अत्यंत कठिन होता है ।

2. अन्य तत्वों के गुणों पर प्रभाव - लैंथेनाइड संकुचन का लैंथेनाइडों से पूर्व आने वाले तथा इनके बाद आने वाले तत्वों के आपेक्षिक गुणों पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है ।
जैसे - टाइटेनियम और जिरकोनियम के गुणों में भिन्नता होती है , जबकि जिरकोनियम (Zr) और हाफनियम(Hf) के गुणों में काफी समानता होती है।

3. सह संयोजक लक्षण - लैंथेनाइड संकुचन के कारण आयनों की धड़कन क्षमता बढ़ती है जिससे सह संयोजक लक्षण बढ़ता है तथा क्षारीय प्रकृति घटती है । La(OH)3 सबसे अधिक क्षारीय जबकि Lu(OH)3 सबसे कम क्षारीय होता है ।



प्रश्न - दिए गए निम्न परमाणु संख्याओं में से अंतर संक्रमण तत्वों के परमाणु संख्याओं का निर्धारण कीजिए - 29, 59, 74, 95, 102 , 104.

उत्तर - इनमें लैंथेनाइड 58 से 71 तक एवं एक्टिनाइड 90 से 103 तक होते हैं । अतः परमाणु क्रमांक 59 , 95  एवं 102 वाले तत्व अंतर संक्रमण तत्व हैं ।



प्रश्न - एक्टिनाइड श्रेणी का अंतिम तत्व कौन सा है  ? इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए एवं इस तत्व की संभावित ऑक्सीकरण अवस्था पर टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर - एक्टिनाइड श्रेणी का अंतिम तत्व लौरेंशियम( Lr- 103 ) है । इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [ Rn ] 5f14 , 6d1 , 7s2 है एवं संभावित ऑक्सीकरण अवस्था +3 है ।



प्रश्न - परमाणु क्रमांक 61 , 91 , 101 एवं 109 वाले तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए ।
उत्तर -

Z=    61    [ Xe ] 4f5  ,  5d0 , 6s2
Z=    91    [ Rn ] 5f2 ,   6d1 , 7s2
Z = 101    [ Rn ] 5f13 , 6d0 , 7s2
Z = 109    [ Rn ] 5f14 , 6d7 , 7s2


Chemistry by H.K Sir

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