Class 12th Chapter 9 PART 6 अंतः संक्रमण तत्व ll

प्रश्न - अंतः संक्रमण तत्व क्या है ? उदाहरण दीजिए ।
उत्तर - अंतः संक्रमण - वे तत्व जिनमें परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ आने वाला इलेक्ट्रॉन उनके परमाणु के अंतिम से दो कक्ष पूर्व वाले कक्ष के f उपकक्ष में प्रवेश करता है । अंतः संक्रमण तत्व कहलाते हैं । यह तत्व f - ब्लॉक के तत्व भी कहलाते हैं । इनमें दो श्रेणियां 4f एवं 5f उपस्थित होती हैं । यह तत्व आंतर संक्रमण तत्व भी कहलाते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन (n-1) कोश अर्थात उपांतिम कोश के भीतर के कोश में भरे जाते हैं । इनमें कुल तत्वों की संख्या 28 है । इनके बाहरी 3 कक्ष अपूर्ण होते हैं ।
f ब्लॉक तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-2 )f1-14 , (n-1)d0-1 , ns2 होता है ।

La(57) , Ac (89) , Ce ( 58) , Pr(59) 


f ब्लॉक तत्वों का वर्गीकरण - इन तत्वों को दो श्रेणियों 4f एवं 5f में बांटा गया है - 
1. प्रथम आंतर संक्रमण श्रेणी या लैंथेनाइड श्रेणी - वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में प्रवेश करते हैं , वे लैंथेनाइड या प्रथम आंतर संक्रमण श्रेणी के तत्व कहलाते हैं । यह तत्व आवर्त सारणी में लेंथेनम के बाद आते हैं इसलिए लैंथेनाइड कहलाते हैं । लैंथेनाइड श्रेणी में कुल 14 तत्व आते हैं । इस वर्ग में लेंथेनम(La-57)नहीं आता है , क्योंकि वह d-ब्लॉक का तत्व है ।यह तत्व आवर्त सारणी के नीचे पृथक रखे गए हैं ।

                   [ Ce (58) से Lu (71) ]


2. द्वितीय आंतर संक्रमण श्रेणी या एक्टिनाइड श्रेणी - वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन 5f उपकोश में प्रवेश करते हैं , वे एक्टिनाइड या द्वितीय आंतर संक्रमण श्रेणी के तत्व कहलाते हैं । यह तत्व आवर्त सारणी में एक्टिनियम के बाद आते हैं इसलिए एक्टिनाइड कहलाते हैं । एक्टिनाइड श्रेणी में कुल 14 तत्व आते हैं । इस वर्ग में एक्टिनियम(Ac-89) नहीं आता है , क्योंकि वह d-ब्लॉक का तत्व है । यह तत्व आवर्त सारणी के नीचे पृथक रखे गए हैं ।

                  [ Th (90) से Lr (103) ]

प्रश्न - लैंथेनाइड के सामान्य गुण लिखिए ।
उत्तर - 1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास - लैंथेनाइड ओं का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [ Xe ] 4f1-14 , 5d0-1 , 6s2 हैै ।

2. ऑक्सीकरण अवस्थाएं - लैंथेनाइडो की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +3 है । यह ऑक्सीकरण अवस्था 6s2 एवं 5d से तीनों इलेक्ट्रॉनों के निकलने के कारण होती है । कुछ तत्व +2 एवं +4 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करते हैं ।

3. रंग (Colour) - लैंथेनाइड आयन रंगीन होते हैं इसका कारण आंशिक रूप से भरे हुए f - कक्षक होते हैं । इन आयनों का रंग f-f संक्रमण हेतु दृश्य प्रकाश के अवशोषण के कारण होता है ।
जैसे - 
Pm3+ - हरा
Tm3+ - हरा 
Nd3+ - गुलाबी

4. अनुचुंबकीय प्रकृति - 4f उपकोश में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण अधिकांश लैंथेनाइड आयन अनुचुंबकीय गुण प्रदर्शित करते हैं । केवल La3+ एवं Lu3+ आयन प्रतिचुंबकीय प्रकृति के होते हैं , क्योंकि इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं ।

5. आयनन ऊर्जाएं एवं विद्युत धनात्मक लक्षण - सामान्यता सभी लैंथेनाइडों की आयनन ऊर्जा निम्न होते हैं एवं यह सभी विद्युत धनात्मक प्रकृति के होते हैं । इन तत्वों की विद्युत धनात्मक प्रकृति इनके बड़े परमाणु आकार एवं आयनन ऊर्जा के निम्न मान के कारण होती है । 

6. गलनांक एवं क्वथनांक - लैंथेनाइडों के गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं , किंतु परमाणु क्रमांक वृद्धि के साथ नियमित क्रम नहीं पाया जाता है ।


7. संकुल निर्माण - सभी लैंथेनाइड आयन EDTA के साथ संकुल बनाते हैं । छोटे आयन प्रबल संकुल बनाते हैं , किंतु लैंथेनाइडों में संकुल बनाने की प्रवृत्ति अधिक नहीं होती है , क्योंकि इनका आवेश घनत्व निम्न होता है । संकुल बनाने की प्रवृत्ति एवं संकुल का स्थायित्व परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ बढ़ता है।


प्रश्न - लैंथेनाइडों के उपयोग लिखिए ।
उत्तर - लैंथेनाइडों के उपयोग - 
1. गैस लैंप मेंटल बनाने में ( Ce , Th के ऑक्साइड )

 2. जेट इंजन के पार्ट्स बनाने में (30% मिशधातु एवं 1% Zr )

3. रंगीन कांच एवं फिल्टर बनाने में ( Pr2O3 एवं Nd2O4 )

4. पेट्रोलियम भंजन में उत्प्रेरक के रूप में ।

5. टेलीविजन स्क्रीन में ।



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