Class 12th Chapter - 10 Haloalkane & Haloarene
Class 12th Chapter - 10 Haloalkane & Haloarene
प्रश्न - क्लोरोफॉर्म के रासायनिक गुण लिखिए।
अथवा
क्लोरोफॉर्म की निम्न अभिक्रिया को समझाइए -
1. ऑक्सीकरण
2. अपचयन
3. जल अपघटन
4. नाइट्रीकरण
5. विहैलोजनीकरण
6. रीमरटीमेन
7. कार्बिल एमीन अभिक्रिया
8. क्लोरीनीकरण
9. संघनन
प्रश्न - क्लोरोफॉर्म को सुरक्षित रखने की सावधानियां लिखिए ।
अथवा
१. क्लोरोफॉर्म को भूरी बोतलों में भरकर रखा जाता है , क्यों ?
२. क्लोरोफॉर्म में 1% एथिल एल्कोहल मिलाकर रखा जाता है , क्यों ?
उत्तर - क्लोरोफॉर्म को सुरक्षित रखने की निम्न में सावधानियां है -
1. क्लोरोफॉर्म को कांच की डॉट लगी नीले - भूरे रंग की बोतल में लगभग मुंह तक भरकर रखते हैं ऐसा करने से प्रकाश तथा वायु दोनों का ही प्रभाव नहीं होता है ।
2. इसमें लगभग 1% एथिल एल्कोहल मिला देने से इसका ऑक्सीकरण बहुत कम हो जाता है ,यदि कुछ फास्जीन बनती भी है , तो वह एथिल एल्कोहल से अभिक्रिया करके हानिरहित एथिल कार्बोनेट बना लेती है।
प्रश्न - क्लोरोफॉर्म बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर - प्रयोगशाला तथा व्यापारिक स्तर पर क्लोरोफॉर्म एथिल एल्कोहल अथवा एसीटोन को विरंजक चूर्ण और जल अथवा क्लोरीन और प्रबल क्षार के साथ गर्म करके बनाया जाता है । अभिक्रियाएं निम्न चरणों में पूरी होती हैं -
1. विरंजक चूर्ण पर जल की क्रिया से आवश्यक क्लोरीन और कैल्शियम हाइड्रोक्साइड बनते हैं।
ब्लीचिंग पाउडर से मुक्त हुई क्लोरीन , एथिल एल्कोहल या एेसीटोन के साथ निम्न पदों के अनुसार क्रिया करते हैं -
2. क्लोरीन पहले ऑक्सीकारक और फिर क्लोरीनीकारक के रूप में कार्य करते हैं। और बना हुआ क्लोरल , कैलशियम हाइड्रोक्साइड से जल अपघटित होकर क्लोरोफॉर्म बनाता है।
नामांकित चित्र -
अभिक्रिया के समीकरण -
प्रश्न - फ्रीऑन बनाने की विधि , गुण एवं उपयोग लिखिए ।
उत्तर - फ्रीऑन - मेथेन तथा एथेन के क्लोरो फ्लोरो व्युत्पन्न को फ्रीऑन अथवा सीएफसी कहते हैं । सबसे महत्वपूर्ण फ्रीऑन डाई क्लोरो डाई फ्लोरो मेथेन है , इसे फ्रीऑन-12 भी कहते हैं ।
फ्रीऑन बनाने की विधि - कार्बन टेट्राक्लोराइड की एंटीमनी फ्लोराइड के साथ एंटीमनी पेंटाक्लोराइड की उपस्थिति में गर्म करने पर फ्रीऑन बनता है।
समीकरण -
फ्रीऑन के गुण -
1. यह एक द्रव है जिस का गलनांक 29.6 डिग्री सेल्सियस है।
2. यह अक्रिय , रंगहीन , गंधहीन , अज्वलनशील रसायन है।
3. यह वायुमंडल में लंबी अवधि तक बना रहता है।
फ्रीऑन के उपयोग -
1. इसका उपयोग प्रशीतक के रूप में किया जाता है।
2.
3.
प्रश्न - हैलोएरीन बनाने की विधियां , गुण एवं उपयोग लिखिए ।
अथवा
हैलोएरीन को निम्न से कैसे बनाएंगे -
1. हैलोजनीकरण से
2. डाइएजोनियम लवण से
3. फिनोल से
4. हुंसडीकर विधि द्वारा
5. रेशिंग विधि द्वारा
हैलोएरीन के भौतिक गुण -
1. यह रंगहीन के लिए द्रव होते हैं।
2. यह जल में आविलेय होते हैं।
क्लोरो बेंजीन के उपयोग -
1.फिनोल और एनीलीन के निर्माण में ।
2.डीडीटी के निर्माण में ।
3.पिक्रिक अम्ल के निर्माण में ।
प्रश्न - क्लोरो बेंजीन से निम्न को कैसे बनाओगे -
1. फिनोल
2.एनीलीन
3.फेनिलसायनाइड
4.टालुईन (वुर्ट्ज- फिटिंग अभिक्रिया)
5.डाइफेनिल - (फिटिंग अभिक्रिया)(उल्मान अभिक्रिया)
6.ग्रिगनार्ड अभिकर्मक
7.बेंजीन
8. DDT
9. एनीसॉल
प्रश्न - क्लोरोबेंजीन की इलेक्ट्रोफिलिक एरोमेटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया लिखिए।
अथवा
क्लोरो बेंजीन की निम्न अभिक्रिया को समझाइए -
1. हैलोजनीकरण
2. नाइट्रीकरण
3. सल्फोनीकरण
4. एल्किली कारण
5. ऐसीटिलीकरण
प्रश्न - डीडीटी बनाने की विधि , गुण एवं उपयोग लिखिए ।
उत्तर - डी.डी.टी - इसका पूरा नाम डाई क्लोरो डाई फेनिल ट्राई क्लोरोएथेन है। इसे सर्वप्रथम ऑथमल जोडलर ने सन 1874 में बनाया था , किंतु मिलर ने इसके कीटनाशी गुणों को ज्ञात किया ।
डीडीटी बनाने की विधि - क्लोरो बेंजीन की सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में क्लोरल के साथ अभिक्रिया करवाने पर डीडीटी बनता है ।
समीकरण -
डीडीटी के गुण -
1. यह एक प्रबल कीटनाशी है ।
2.यह एक रंगहीन क्रिस्टलीय पदार्थ है।
3.यह जल में अविलेय है ।
डीडीटी के उपयोग -
1. इसका उपयोग कृषि में कीटनाशक के रूप में किया जाता है।
प्रश्न - बी.एच.सी. बनाने की विधि , गुण एवं उपयोग लिखिए ।
उत्तर - इसे गेमैक्सीन , 666 , लिंडेन के नाम से भी जाना जाता है ।
बी.एच.सी. बनाने की विधि -
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