Class 12th Chapter 2 विलयन PART - 2 ll विलयन के प्रकार ll हेनरी नियम एवं उसके अनुप्रयोग
Class 12th Chapter 2 विलयन PART - 2 ll विलयन के प्रकार ll हेनरी नियम एवं उसके अनुप्रयोग
प्रश्न - अवस्था के आधार पर बिलयन कितने प्रकार के होते हैं समझाइए ।
उत्तर - अवस्था के आधार पर विलयन निम्न तीन प्रकार के होते हैं -
A. ठोसीय विलयन - जब किसी बिलयन को ठोसीय अवस्था में प्राप्त किया जाता है, तब यह ठोसीय विलयन कहलाता है ।
जैसे - पारे का सोडियम के साथ अमलगम ,तांबे में जिंक का बिलयन(पीतल) आदि।
B. द्रवीय विलयन - जब किसी बिलयन को द्रव अवस्था में प्राप्त किया जाता है, तब यह द्रवीय विलयन कहलाता है ।
जैसे - नमक व शक्कर का जलीय विलयन, एल्कोहल का जल में विलयन आदि।
C. गैसीय विलयन - जब किसी बिलयन को गैस अवस्था में प्राप्त किया जाता है, तब यह गैसीय विलयन कहलाता है ।
जैसे - गैसों के मिश्रण , वायु आदि।
प्रश्न - सांद्रता के आधार पर बिलयन कितने प्रकार के होते हैं समझाइए।
उत्तर - सांद्रता के आधार पर विलयन निम्न पांच प्रकार के होते हैं -
1. तनु विलयन
2. सांद्र विलयन
3. संतृप्त विलयन
4. असंतृप्त विलयन
5.अति संतृप्त विलयन
1. तनु विलयन - वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की मात्रा कम होती है ,तनु विलयन कहलाता है।
2. सांद्र विलयन - वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की मात्रा अधिक होती है , सांद्र विलयन कहलाता है।
3. संतृप्त विलयन - वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की और अधिक मात्रा नहीं घोली जा सकती है , संतृप्त विलयन कहलाता है।
4. असंतृप्त विलयन - वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की और अधिक मात्रा घोली जा सकती है , असंतृप्त विलयन कहलाता है।
5.अति संतृप्त विलयन - वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्त विलयन से अधिक होती है , अति संतृप्त विलयन कहलाता है।
प्रश्न - हेनरी का नियम लिखिए तथा गैसों की द्रवों में विलेयता को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
हेनरी का विलेयता संबंधी नियम क्या है ? इसके अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर - हेनरी का नियम - गैस की द्रव में विलेयता पर दाब के प्रभाव को समझाने के लिए हेनरी नामक वैज्ञानिक ने एक नियम प्रस्तुत किया , जिसे हेनरी का नियम कहते हैं ।
इस नियम के अनुसार - स्थिर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता , गैस के दाब के समानुपाती होती है। अर्थात गैस का विलयन के ऊपर दाब जितना अधिक होगा उसकी विलेयता उतनी ही अधिक होगी।
m समानुपाती p
m = Kp
K = m/p
यहां K = एक समानुपाती स्थिरांक है जिसे हेनरी स्थिरांक कहते हैं ।
m = विलायक के इकाई आयतन में घुली गैस का द्रव्यमान
p = साम्यावस्था पर विलायक के ऊपर गैस का दाब
गैसों की द्रवों में विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक -
1. गैस एवं द्रव की प्रकृति - सरलता से द्रवित होने वाली अथवा विलायक के साथ शीघ्रता से क्रिया करने वाली गैसों की विलेयता अधिक होती है , जबकि कठिनता से द्रवित होने वाली गैस की बिलेयता कम होती है।
2.ताप का प्रभाव - निम्न पर गैसों की द्रवों में बिलेयता अधिक होती है, जबकि उच्च ताप पर विलेयता घटती है अर्थात कम होती है।
3.दाब का प्रभाव - दाब बढ़ाने पर गैसों की द्रव में विलेयता बढ़ती है , जबकि निम्न दाब पर गैसों की विलेयता घटती है।
हेनरी नियम के अनुप्रयोग -
1. कार्बनिकृत पेय पदार्थों के उत्पादन में।
2. रक्त में घुली गैसों के विनिमय में।
3. गहरे समुद्र में गोताखोरी के लिए।
4. बहुत ऊंचाई पर ।
5. जलीय जीवन में ।
हेनरी नियम की सीमाएं -
1. यह नियम केवल आदर्श अवस्था अर्थात कम दाब एवं उच्च ताप पर ही लागू होता है।
2. गैस का बिलयन में संगुणन या वियाेजन नहीं होना चाहिए।
3. गैस एवं विलायक के मध्य कोई रासायनिक क्रिया संपन्न नहीं होना चाहिए।
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