Class 12th Chapter 7 PART 12 ll सल्फ्यूरिक अम्ल निर्माण की संपर्क विधि ll

Class   12th   Chapter  7  PART 12 ll 

सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण की संपर्क विधि 


प्रश्न - सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण की संपर्क विधि को निम्न बिंदुओं के आधार पर वर्णन कीजिए - 

A. संपर्क विधि का सिद्धांत    
B. संयंत्र का नामांकित चित्र 
C. संयंत्र के महत्वपूर्ण भाग तथा क्रियाओं का वर्णन


                       अथवा

सल्फ्यूरिक अम्ल निर्माण की संपर्क विधि को सचित्र समझाइए।
उत्तर - सिद्धांत - जब सल्फर डाइऑक्साइड और वायु का मिश्रण गरम उत्प्रेरक के ऊपर प्रवाहित किया जाता है तो सल्फर डाइऑक्साइड वायु की ऑक्सीजन से क्रिया करके सल्फर ट्राइ ऑक्साइड में ऑक्सीकृत हो जाती है । इस SO3 पर जल की क्रिया करने पर सल्फ्यूरिक अम्ल बन जाता है।

               2SO2 + O2 -----> 2SO3

               SO3 + H2O ----->  H2SO4

नामांकित चित्र - 






संयंत्र के मुख्य भाग - 
1.पाइराइट या गंधक भट्टी   2.धूल कक्ष   3.शीतलक पाइप   4.धावन स्तंभ   5.शुष्कन स्तंभ   6.शोधक   7.परीक्षण बॉक्स   8.संपर्क कक्ष   9. अवशोषक कक्ष

1. पाइराइट या गंधक भट्टी - यह भट्टियां होती हैं जिनमें आयरन पायरायटीज या गंधक को हवा की उपस्थिति में जलाकर सल्फर डाइऑक्साइड बनाई जाती है।

2. धूल कक्ष - पाइराइट भट्टी से निकली हुई गैस धूल कक्ष में भेजी जाती हैं जिसमें ऊपर से जल वाष्प आती रहती है । भाप , गैसों में उपस्थित धूल के कणों पर जमकर उन्हें नीचे बैठा देती है ।

3. शीतलक पाइप - यह सीसे के बने होते हैं । इन से गुजरने पर गैस ठंडी हो जाती हैं और ताप लगभग 100 डिग्री सेल्सियस पर आ जाता है।

4. धावन स्तंभ - सीसे के बने इस स्तंभ में क्वार्टज के टुकड़े भरे रहते हैं और ऊपर से ठंडे जल की धारा फुब्बारे के रूप में आती है । इस स्तंभ में गैसों में से आविलेय अशुद्धियां अलग हो जाते हैं । और वह घुलकर स्वच्छ भी हो जाती हैं।


5.शुष्कन स्तंभ - इस स्तंभ में क्वार्टज के टुकड़े रहते हैं और ऊपर से सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल टपकता रहता है ।धावन स्तंभ से प्राप्त गैसों की नमी को सल्फ्यूरिक अम्ल अवशोषित कर लेता है।

6. शोधक - स्वच्छ तथा शुष्क गैसों को एक ऐसे स्तंभ से प्रवाहित किया जाता है, जिसमें फेरिक हाइड्रोक्साइड का अवक्षेप रखा रहता है । वह गैसों में रहने वाले आर्सेनिक के यौगिक जिसमें को सोख लेता है । 

7. परीक्षण बॉक्स - शुद्ध की गई गैसों की समय-समय पर परीक्षण बॉक्स में जांच की जाती है । यदि बॉक्स में कुछ दिखाई नहीं देता , पूर्ण अंधेरा रहता है ,तो गैसे शुद्ध मानी जाती हैं।

8. संपर्क कक्ष - शुद्ध तथा शुष्क सल्फर डाइऑक्साइड व हवा का मिश्रण यहां उत्प्रेरक के संपर्क में आ जाता है और SO2 का SO3 में ऑक्सीकरण होता है ।

9. अवशोषण स्तंभ - संपर्क कक्ष में उत्पन्न सल्फर ट्राइ ऑक्साइड को अवशोषण स्तंभ में भेजा जाता है । जिसमें क्वार्टज के टुकड़े भरे रहते हैं और ऊपर से 98% सांद्रता का सल्फ्यूरिक अम्ल टपकता रहता है । SO3 का H2SO4 में अवशोषण होने से संधूम H2SO4 बन जाता है । जो ओलियम भी कहलाता है ।

                SO3 + H2SO4 -----> H2S2O7

 ओलियम में जल की परिकलित मात्रा मिलाकर निश्चित सांद्रता का सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त कर लिया जाता है।

                 H2S2O7 + H2O -----> H2SO4


प्रश्न - संपर्क विधि , शीश कक्ष विधि से उत्तम होती है कैसे ।
उत्तर - संपर्क विधि के सीस कक्ष विधि से उत्तम होने के कारण निम्न है - 

1. संपर्क विधि से शुद्ध व किसी भी इच्छित सांद्रता का अम्ल प्राप्त किया जा सकता है।

2. इसमें ठोस उत्प्रेरक प्रयुक्त किया जाता है।

3. इसमें SO2 का SO3 में पूर्ण ऑक्सीकरण हो जाता है।


प्रश्न - सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में संपर्क विधि को सीस कक्ष विधि से अधिक उपयुक्त क्यों माना जाता है।

                            अथवा 

H2SO4 के निर्माण की संपर्क विधि ,सीस कक्ष विधि से श्रेष्ठ है , क्यों ? 

उत्तर - 1.संपर्क विधि से प्राप्त अम्ल शुद्ध होता है , किंतु सीस कक्ष विधि से प्राप्त अम्ल अशुद्ध होता है।

2. संपर्क विधि के संयंत्र के लिए कम स्थान लगता है , जबकि सीस कक्ष विधि के संयंत्र के लिए अधिक स्थान लगता है।

3.संपर्क विधि में ठोस उत्प्रेरक प्रयुक्त होता है , जबकि सीस कक्ष विधि में प्रयुक्त उत्प्रेरक गैसीय होता है।

4. संपर्क विधि संयंत्र को लगाने में सीस कक्ष संयंत्र की तुलना में कम खर्च आता है।

5. संपर्क विधि से प्राप्त अम्ल अधिक सांद्र होता है, किंतु सीस कक्ष विधि से तनु अम्ल प्राप्त होता है।



प्रश्न - सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण की सीस कक्ष विधि के प्रयुक्त ग्लोबर स्तंभ के कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर - 
1. सीस कक्ष का अम्ल जिसमें जल के अशुद्धि होती है। SO2 से मिलकर H2 SO4 अम्ल बनाता है , जिससे इस अम्ल का सांद्रण 80% तक हो जाता है।

2. गेलुसैक स्तंभ से प्राप्त नाइट्रिकृत H2SO4 में से N2 ऑक्साइड मुक्त हो जाते हैं।

3. बर्नर से प्राप्त SO2 तथा है NO2 का मिश्रण 50 से 80 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है।

4. इस स्तंभ में कुछ SO2 का SO3 में ऑक्सीकरण हो जाता।

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