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परिरक्षण प्रभाव एवं आयनन ऊर्जा

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प्रश्न - परिरक्षण प्रभाव किसे कहते हैं ? उत्तर - परिरक्षण प्रभाव - नाभिक   एवं अंतिम कोश के  इलेक्ट्रोनों के बीच एक ऐसा प्रतिकर्षी आवरण कार्य करता है  जो नाभिक के आकर्षण को कम कर देता हैैैै इसे आवरणी प्रभाव या परिरक्षण प्रभाव या शील्डिंग इफेक्ट या स्क्रीनिंग प्रभाव कहते हैं। प्रश्न - आयनन ऊर्जा किसे कहते हैं इसे प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए । उत्तर -आयनन ऊर्जा  -किसी तत्व के विलगित या गैसीय परमाणु के बाहरी कक्ष में से एक इलेक्ट्रॉन बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को उस तत्व की आयनन ऊर्जा या आयनन विभव कहते हैं। आवर्त में -  आवर्त में बाएं से दाएं जानेेे पर आयनन ऊर्जा का मान अधिक होता जाताा है क्योंकि नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण परमाणु का आकार घटता है जिससे आयनन ऊर्जा का मान बढ़ जाता है।   वर्ग में -  वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है जिससे अयनन ऊर्जा का मान घटता है। #आयनन ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारक -  आयनन ऊर्जा को निम्नलिखित को कारक प्रभावित करते हैं- 1.परमाणु आकार -  परमाणु का आकार अधिक होने पर...

Class 11th Chapter 7 अम्लीय एवं क्षारीय बफर विलयन की क्रिया विधि

प्रश्न - अम्लीय बफर विलयन की क्रिया विधि समझाइए । उत्तर - एसिटिक अम्ल और सोडियम एसिटेट का विलयन अमलीय बफर विलयन का उदाहरण है । सोडियम एसीटेट प्रबल विद्युत अपघट्य है इसके आयनन से बहुत अधिक एसीटेट आयन प्राप्त होते हैं , सोडियम एसीटेट के समआयन प्रभाव द्वारा एसिटिक अम्ल के आयनन को कम कर देता है जिससे बहुत कम हाइड्रोजन आयन बनते हैं               CH3COONa ----> CH3COO- + Na+                CH3COOH -----> CHCOO- + H+ इस बफर विलयन में एक बूंद HCl मिलाने पर जो हाइड्रोजन आयन उत्पन्न होते हैं वे CH3COO- आयन से संयुक्त होकर एसिटिक अम्ल बना लेते हैं , जिनका आयनन बहुत कम होता है।  अतः HCl जैसे प्रबल विद्युत अपघटय मिलाने पर भी विलयन के हाइड्रोजन आयन के सांद्रण में वृद्धि नहीं हो पाती है ।             CH3COONa ----> CH3COO- + Na+                       HCl --------> H+ + Cl- प्रश्न - क्षारीय बफर विलयन की क्...

Class 12th Chapter 6 ll बॉक्साइट अयस्क से Al धातु का निष्कर्षण

प्रश्न - बॉक्साइट अयस्क से एल्युमीनियम धातु का निष्कर्षण कैसे किया जाता है, समझाइए । उत्तर - एल्युमीनियम का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट है । इससे एल्युमीनियम धातु का निष्कर्षण निम्न पदों में किया जाता है - A. बॉक्साइट का शोधन B. एलुमिना का विद्युत अपघटन C.एल्युमीनियम का शोधन A.बॉक्साइट का शोधन - बॉक्साइट में मुख्यतः आयरन, टाइटेनियम एवं सिलिकॉन के ऑक्साइड ,अशुद्धियों के रूप में रहते हैं एल्युमीनियम के निष्कर्षण का पहला चरण इन अशुद्धियों को निम्न विधियों में से किसी एक विधि द्वारा हटाया जाना जरूरी है -  1. बायर विधि(Buyer's process) - इस विधि का उपयोग कब किया जाता है जब बॉक्साइट में हेमेटाइट(Fe2O3) की प्रतिशत मात्रा अधिक होती है । 2.सरपेक विधि(Serpek's process) - इस विधि का उपयोग तब किया जाता है । जब अयस्क में सिलिका(SiO2) की अशुद्धि अधिक होती है । इस विधि का एक लाभ यह है कि इसमें सह उत्पाद के रूप में महत्वपूर्ण * अमोनिया * गैस भी प्राप्त होती है । 3.हॉल विधि(Hall's process) - इस विधि का उपयोग किया जाता है जब उसमें हेमेटाइट एवं सिलिका दोनों की अशुद्धि मिली रहती है ...

CLASS 11TH अध्याय 3 PART 11

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प्रश्न - किसी तत्व का परमाणु क्रमांक 17 है इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसका स्थान निश्चित कीजिए। उत्तर - जिस तत्व का परमाणु क्रमांक 17 है उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है -  1.ब्लॉक - बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3s2 3p5 है जिससे स्पष्ट है कि यह तत्व p- ब्लाॅक का है क्योंकि अंतिम इलेक्ट्रॉन p ब्लाॅक में रखा गया है । 2.समूह - इसका कोश अपूर्ण है तथा इलेक्ट्रोनों की संख्या उसके समूह का निर्धारण करती है अतः यह तत्व सातवें समूह का है। 3. आवर्त - किसी तत्व के कोशों की संख्या उसके आवर्त को दर्शाती है अतः इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से स्पष्ट है कि यह तत्व तीसरे आवर्त का है । प्रश्न - धनायन का आकार संगत परमाणु से छोटा होता है । क्यों ? उत्तर - किसी परमाणु के एक या अधिक इलेक्ट्रॉन खोने से धनायन का निर्माण होता है इस प्रक्रम में नाभिक में प्रोटनों की संख्या और नाभिकीय आवेश तो नाभिक में समान रहता है लेकिन बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन की संख्या घट जाती है परिणामस्वरूप नाभिकीय आकर्षण बल प्रति इलेक्ट्रॉन बढ़ जाता है और बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन मजबूती से नाभिक से ...

अध्याय 3 विद्युत रसायन PART - 19

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   श्री कोचिंग क्लासेस बेगमगंज   CHEMISTRY By H.K Sir    Contact us - 7566113339 ईधन सेल - वे सेेल जिनमें हाइड्रोजन ,ऑक्सीजन ,मेथेेन आदि ईंधन के दहन से प्राप्त उर्जा को सीधे को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है ईंधन सेल कहलाते हैं। उदाहरण - H2-O2 ईंधन सेल इसका सबसे अच्छा उदाहरण है इस तरह के H2-O2 ईंधन सेल का उपयोग चंद्रमा पर उतरने वाले अपोलो अंतरिक्ष यान में सफलतापूर्वक किया गया था। क्रियाविधि - इस सेल में हाइड्रोजन गैस तथा ऑक्सीजन गैसों को छिद्र युक्त कार्बन इलेक्ट्रोड से होकर सांद्र NaOH या KOH विलयन मेंं बुलबुलों के के रूप में प्रवाहित करते हैं । हाइड्रोजन गैस एनोड़ कक्ष मेंं भेजी जाती है  जहां उसका ऑक्सीकरण होता है तथा ऑक्सीजन गैस कैैथोड़ कक्ष में भेजते है जहांं उसका अपचयन होताा है और सेल मेंं अभिक्रिया निम्न प्रकार सेे होती -  अतः गैसीय मिश्रण को सतत रखने पर सेल लगातार कार्य करते रहता है इस तरह के सेलों को सामान्यतः 70 से 140 डिग्री सेल्सियस ताप पर...

कक्षा 11th अध्याय 4 PART 3

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    Shricoaching Classes Begamganj              Chemistry by H.K SIR प्रश्न - ध्रुवीय तथा अध्रुवीय सहसंयोजक बंध किसे कहते हैं ? उत्तर - ध्रुवीय सहसंयोजक बंध - असमान परमाणुओं के मध्य बनने वाले सहसंयोजक बंध को ध्रुवीय सहसंयोजक बंध कहते हैं। उदाहरण - HCl,HF etc. अध्रुवीय सहसंयोजक बंध - समान परमाणुुु के मध्य बनने वाले सहसंयोजक बंध को  अध्रुवीय सहसंयोजक बंध कहते हैं । उदाहरण - H2,O2,N2 etc. प्रश्न - अतिव्यापन किसे कहते हैं यह कितने प्रकार के होते हैं ? उत्तर -अतिव्यापन (Overlapping) - जब परमाणु यह कक्षक एक दूसरे के पास आते हैं तो उनका कुछ भाग एक दूसरे में समा जाता है और इसके फलस्वरूप अणु का निर्माण होता है इसे अतिव्यापन कहते हैं । अतिव्यापन के प्रकार - अतिव्यापन मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं -  1.S-S अतिव्यापन - जब एक परमाणु का s-कक्षक दूसरे परमाणु के s-कक्षक के पास आता है तो इनका कुछ भाग एक दूसरे में समा जाता है तब इस प्रकार के अतिव्यापन को s-s  अतिव्यापन कहते हैं । जैसे - हाइड्रोजन अणु ...

कक्षा 11th अध्याय 4 पार्ट - 1

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           SHRICOACHING CLASSES  BEGAMGANJ                 CHEMISTRY BY H.K SIR प्रश्न 1.रासायनिक बंध किसे कहते हैं ? यह कितने प्रकार के होते हैं। उत्तर -  रासायनिक बंध -  रासायनिक बंध वह बंध है ,जो अणुओं में उपस्थित परमाणुओं को आपस में बांधे रखता है । रासायनिक बंध के प्रकार -  रासायनिक बंध निम्न तीन प्रकार के होते हैं -  1. आयनिक बंध ( Ionic bond) 2.सहसंयोजक बंध (Co- valent bond) 3. उपसहसंयोजक बंध (co-ordinate bond) प्रश्न - 2. संयोजी इलेक्ट्रॉन किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित लिखिए। उत्तर -  संयोजी इलेक्ट्रॉन - किसी तत्व या परमाणु का अंतिम कोश संयोजी कोश कहलाता है ,तथा  उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं। उदाहरण - सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है इसलिए इसमें संयोजी कोश की संख्या 3 तथा इसमें उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या 1 है। प्रश्न -3. अष्टक नियम क्या है ? उदाहरण दीजिए । उत्तर - आधुनिक अष्टक नियम - प्रत्येक तत्व के परमाणु अपने निकटतम अक्रिय...